कवर्धा में सरकारी आवास आवंटन में बड़ा भ्रष्टाचार, नियम ताक पर—योग्य कर्मचारी दर-दर भटकने को मजबूर

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पत्रकार:- दीपक तिवारी

कवर्धा। जिले में सरकारी आवास आवंटन को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों और पीड़ित कर्मचारियों के अनुसार, कवर्धा शहर में स्वयं का पक्का मकान रखने वाले अधिकारियों–कर्मचारियों को भी सरकारी आवास आवंटित कर दिया गया है, जबकि दूसरे जिलों से ट्रांसफर होकर आए कर्मचारी किराये के मकानों में रहने को मजबूर हैं।

स्थिति यह है कि कई कर्मचारी महीनों से आवेदन लेकर कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन बिना “पैसा” दिए उनका आवास आवंटन नहीं हो पा रहा। वहीं, नियमों को ताक पर रखकर कुछ चुनिंदा लोगों को आसानी से सरकारी आवास मिल जाना, पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।

बिना लेन-देन के नहीं होता आवंटन?

कर्मचारियों का आरोप है कि सरकारी आवास आवंटन अब जरूरत और पात्रता के आधार पर नहीं, बल्कि लेन-देन के आधार पर हो रहा है। जिनकी शहर में निजी संपत्ति है, वे सरकारी मकान पर कब्जा जमाए बैठे हैं, जबकि वास्तव में उन्हें इसकी पात्रता ही नहीं है।

क्या कहते हैं सरकारी आवास आवंटन के नियम?

सरकारी सेवा नियमों एवं सामान्य आवास आवंटन नीति के अनुसार—

1. जिस अधिकारी/कर्मचारी के नाम पर उसी नगर/शहर में स्वयं का पक्का मकान हो, वह सरकारी आवास के लिए पात्र नहीं होता।

2. बाहर के जिलों से स्थानांतरित होकर आए कर्मचारी, जिनके पास स्थानीय स्तर पर निजी आवास नहीं है, उन्हें प्राथमिकता दी जाती है।

3. आवास आवंटन वरिष्ठता, पद, आवश्यकता और उपलब्धता के आधार पर किया जाना चाहिए।

4. एक कर्मचारी को एक समय में केवल एक ही सरकारी आवास दिया जा सकता है।

5. पात्रता समाप्त होने या निजी मकान होने की स्थिति में सरकारी आवास तत्काल खाली कराया जाना चाहिए।

नियमों का खुलेआम उल्लंघन

कवर्धा में इन सभी नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। निजी मकान होने के बावजूद सरकारी आवास पर वर्षों से कब्जा, और वास्तविक जरूरतमंद कर्मचारियों को दरकिनार करना, यह दर्शाता है कि आवास आवंटन में भारी भ्रष्टाचार और मिलीभगत चल रही है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

  • सबसे गंभीर सवाल यह है कि प्रशासन इस पूरे मामले पर चुप क्यों है?
  • क्या आवास आवंटन की सूची और पात्रता की जांच कभी हुई?
  • क्या निजी मकान रखने वालों से आवास खाली कराने की कार्रवाई की गई?

यदि प्रशासन ने जल्द निष्पक्ष जांच नहीं की, तो यह मामला केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शासन की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग जाएगा।

जांच और कार्रवाई की मांग

कर्मचारियों और नागरिकों ने मांग की है कि—

  • सभी सरकारी आवासों का पुनः सत्यापन किया जाए
  • जिनके पास निजी मकान हैं, उनसे तत्काल आवास खाली कराया जाए
  • रिश्वत और अनियमितता में शामिल अधिकारियों–कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई हो
  • पात्र कर्मचारियों को नियमों के अनुसार तत्काल आवास आवंटित किया जाए

सरकारी आवास सुविधा है, लूट का साधन नहीं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर आंख खोलता है या फिर भ्रष्टाचार की यह फाइल भी ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी।

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