FIR के बाद 10 साल से अटकी जांच पर हाईकोर्ट की सख्ती, इन पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई

Date:

बिलासपुर। पुलिस विभाग की जांच प्रक्रिया में बेवजह देरी का मामला कोई नया नहीं है, मगर ऐसे ही एक मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें छत्तीसगढ़ की पुलिस दस वर्षों तक एक सह-आरोपी के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल करने में विफल रही। इसके चलते आरोपी ने FIR रद्द करने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में हुई, जहां पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को शपथ पत्र प्रस्तुत कर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया। इस लापरवाही के कारण एक दर्जन से अधिक पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी भी दी गई है।

धन वसूली का लगा था आरोप
दरअसल ‘भारत सेवा संस्थान’ नामक संस्था सामाजिक-आर्थिक विकास हेतु व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करती है। इसी संस्था से जुड़े मुंगेली निवासी देव कुमार जोशी और एक अन्य व्यक्ति पर कुछ छात्रों ने धन वसूली का आरोप लगाया था। 6 जून 2015 को जशपुर जिले के कुनकुरी थाने में देव कुमार जोशी के विरुद्ध FIR दर्ज की गई थी, किंतु जांच में विशेष प्रगति नहीं हुई। इस बीच, देव कुमार को अग्रिम जमानत मिल गई, लेकिन नौ वर्षों से अधिक समय बीतने के बावजूद जांच पूरी नहीं हो सकी। इसी आधार पर देव कुमार ने पुनः हाई कोर्ट में एफआईआर रद्द करने के लिए याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने 5 फरवरी 2025 को डीजीपी को व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश दिया।

देरी के जिम्मेदार अफसरों पर हुई कार्रवाई
इस मामले की सुनवाई 12 फरवरी को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने की। डीजीपी द्वारा प्रस्तुत हलफनामे में दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध निंदा, वेतन वृद्धि रोकने जैसी कार्रवाई की जानकारी दी गई। साथ ही, यह भी बताया गया कि जिन छात्रों को प्रवेश नहीं मिला था, उनके प्रवेश पत्रों पर हस्ताक्षर सत्यापन की रिपोर्ट अब तक प्राप्त नहीं हुई है और जांच जारी है।

FIR रद्द करने से इंकार
कोर्ट ने जांच लंबित रहने के आधार पर एफआईआर रद्द करने की याचिका अस्वीकार कर दी। सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि जिन छात्रों को प्रवेश नहीं मिल सका, उनके प्रवेश पत्रों को हस्ताक्षर सत्यापन के लिए भेजा गया है। हस्तलेखन विशेषज्ञ (हैंडराइटिंग एक्सपर्ट) की रिपोर्ट चार सप्ताह में आने की संभावना है। डीजीपी ने 7 फरवरी 2025 को उच्च न्यायालय में हलफनामा दायर कर यह जानकारी दी कि आरोपी देव कुमार जोशी के हस्ताक्षर के नमूने लिए गए हैं और सत्यापन के लिए भेजे जा चुके हैं।

छह सप्ताह में जांच पूरी करने के निर्देश
याचिकाकर्ता देव कुमार जोशी ने तर्क दिया कि वह प्रवेश पत्र जारी करने के लिए अधिकृत था, अतः उसके विरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता। हाई कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है और जांच लंबित है, जिसे शीघ्र पूरा किया जाना आवश्यक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है और FIR रद्द करने का कोई औचित्य नहीं बनता। न्यायालय ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह आगामी छह सप्ताह के भीतर मामले की जांच पूरी करे।

इन 10 अफसरों के खिलाफ हुआ एक्शन
डीजीपी के निर्देश पर 5 फरवरी 2025 को जशपुर एसपी को आदेश दिया गया कि वे अपराध क्रमांक 94/2015 की जांच कर रहे अधिकारियों से स्पष्टीकरण लें। इसके पश्चात संबंधित अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। तत्कालीन थाना कुनकुरी में पदस्थ निरीक्षक मल्लिका तिवारी, निरीक्षक उषा सोंधिया, विशाल कुजूर, भास्कर शर्मा, लाल जी सिंह, सुनील सिंह, जोगेंद्र साहू, सकल राम भगत, जोशिक राम और प्रशिक्षु डीएसपी नितेश कुमार सहित अन्य अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कदम उठाए गए। इनमें से कुछ की वेतनवृद्धि रोकी गई, जबकि कुछ की सेवा पुस्तिका में निंदा प्रविष्ट की गई।

 

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img
spot_imgspot_img

#Crime Updates

More like this
Related

CG BREAKING: आपत्तिजनक गतिविधियों का भंडाफोड़, 5 महिलाएं व 3 युवक पकड़े गए

CG BREAKING: कोरबा। कोरबा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र...

मैट्स विश्वविद्यालय में सरस्वती पूजा का अयोजन, विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं छात्र हुए शामिल

रायपुर- मैट्स विश्वविद्यालय में मैट्स स्कूल आॅफ लाइब्रेरी साइंस...