आदिवासी हितों को लेकर फिर सियासी बयानबाजी

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रायपुर। बजट सत्र से पहले एक बार फिर राज्य की दो प्रमुख पार्टियों के नेताओं में अलग अलग मुद्दों को लेकर आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं वे कोई भी मुद्दा छोडऩा नहीं चाह रहे हैं। ताजा विवाद आदिवासी जननायक  गुंडाधूर की मूर्ति स्थापित किये जाने पर छिड़ गया है। भाजपा गुंडाधूर की मूर्ति लगाने का समर्थन कर रही है, लेकिन सरकार को सिर्फ दिखावे के लिए मूर्ति लगाने पर नसीहत भी दे रही है।भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के तीन साल की सरकार में सबसे ज्यादा आदिवासियों का शोषण हुआ है जबकि कांग्रेस आदिवासी हितों के लिए किए गए काम को गिनाने से पीछे नहीं हट रही है।
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि किसी भी महापुरुष की मूर्ति लगाने के पीछे उनको स्मरण का उद्देश्य होता है। मूर्ति लगाने से ज्यादा आदिवासी समाज के जीवन में बदलाव कैसे आए, उस पर विचार करना चाहिए। भाजपा सरकार में कई योजनाएं आदिवासियों के लिए चलाई गईं। आदिवासियों को 32 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया। वनोपज के प्रसंस्करण और खरीदी की गई।आदिवासी क्षेत्रों में जिला बनाने, स्कूल खोलने और रोजगार देने का काम किया गया। इससे उनके जीवन में बदलाव आया है। कौशिक ने कहा कि आदिवासियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है। इसे लेकर रायपुर में आंदोलन किया गया। अनाचार, हत्या की घटना में आदिवासी समाज प्रभावित हो रहा है।
नेता प्रतिपक्ष के आरोप पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि गुंडाधूर की प्रतिमा स्थापित करने के अवसर पर भी राजनीतिक धूर्तता दिखाने से बाज नहीं आई। भाजपा राज में इन वर्गों का सिर्फ शोषण हुआ है। निर्दोष आदिवासियों को उत्पीडऩ के अलावा भाजपा ने और कुछ नहीं दिया। भाजपा सरकार ने आदिवासियों की जमीन छीनी थी, कांग्रेस ने वापस लौटाई। भाजपा ने आदिवासी को आदिवासी से लड़वाने का काम किया।भाजपा ने निर्दोष आदिवासियों को नक्सली बताकर फर्जी मुठभेड़ में हत्या कराई। बेकसूर आदिवासियों को जेल में ठूंसा। कांग्रेस सरकार ने उन्हें मुक्ति दिलाई। उनके साथ न्याय किया। भाजपा राज में आदिवासी क्षेत्र नक्सलगढ़ बन गया, लेकिन कांग्रेस सरकार बनने के बाद नक्सलवाद कुछ जिलों में सिमट गया। अब वहां विकासवाद का बोलबाला है।

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