Teacher Subhash Kumar Sahu runs a “free school” for needy children.
रायपुर। जब कोई शिक्षक अपनी नौकरी की औपचारिक जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर विद्यार्थियों को परिवार का हिस्सा मानते हुए उनके भविष्य की जिम्मेदारी उठाता है, तब शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन जाती है। शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, लालपुर, रायपुर में पदस्थ शिक्षक सुभाष कुमार साहू पिछले लगभग छह वर्षों से अपने घर को जरूरतमंद बच्चों के लिए निःशुल्क पाठशाला के रूप में संचालित कर रहे हैं।
साहू विद्यालयीन दायित्वों के बाद अपने घर पर आर्थिक रूप से कमजोर, दिव्यांग तथा शैक्षणिक सहयोग की आवश्यकता वाले बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करते हैं। वे पाठ्यक्रम के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, व्यक्तिगत मार्गदर्शन तथा पुस्तकों और अध्ययन सामग्री की व्यवस्था में भी सहयोग करते हैं। बच्चों की आर्थिक एवं व्यक्तिगत समस्याओं को अपनी समस्या मानकर उनके समाधान का प्रयास उनकी इस पहल को विशेष बनाता है।
शिक्षा के साथ बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से श्री सुभाष साहू उन्हें विभिन्न कौशल-आधारित एवं रोजगारपरक कार्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। बच्चे विद्यालय में प्लंबिंग, कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रीशियन, सिलाई-कढ़ाई, बुनाई, कंप्यूटर, मैकेनिकल और कारपेंटरी जैसे कार्य सीख रहे हैं। वे स्वयं भी विद्यालय परिसर में पेड़ों की छंटाई जैसे कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं तथा बच्चों के साथ मिलकर दीवार निर्माण और दीवारों के रंग-रोगन का कार्य करते हैं। इन गतिविधियों से विद्यार्थियों में श्रम के प्रति सम्मान, कार्यकुशलता, टीम भावना, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित हो रही है।
शिक्षक सुभाष कुमार साहू विज्ञान विषय को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर उसे प्रयोग, गतिविधियों और दैनिक जीवन से जोड़कर विद्यार्थियों के लिए रोचक एवं सहज बना रहे हैं। वे पाठ के महत्वपूर्ण तथ्यों और वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल प्रयोगों एवं गतिविधियों के माध्यम से समझाते हैं, जिससे विद्यार्थी विज्ञान को पढ़ने के साथ उसे अनुभव भी करते हैं। वैज्ञानिक प्रदर्शनियों, मॉडल निर्माण और नवाचार आधारित गतिविधियों के माध्यम से वे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं जिज्ञासा विकसित कर रहे हैं तथा विज्ञान को उनके दैनिक जीवन से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
विद्यालय से लगातार अनुपस्थित रहने या दो-तीन माह तक पढ़ाई से दूर हो जाने वाले बच्चों की स्थिति पर श्री साहू विशेष ध्यान देते हैं। वे ऐसे बच्चों के परिवार से संपर्क कर उनकी समस्याओं को समझते हैं, उन्हें पुनः विद्यालय आने के लिए प्रेरित करते हैं तथा आवश्यक सहयोग प्रदान करते हैं। उनके प्रयासों से कई बच्चे दोबारा विद्यालय से जुड़कर नियमित पढ़ाई कर रहे हैं और अपनी शिक्षा को आगे बढ़ा रहे हैं।
कोरोना काल में जब नियमित पढ़ाई बाधित थी और विद्यालय बंद थे, तब भी उन्होंने बच्चों की शिक्षा जारी रखी। उन्होंने कक्षा आठवीं के 10 विद्यार्थियों को लगातार घर पर पढ़ाकर कोरोना काल में राष्ट्रीय साधन-सह-प्रवीण्य छात्रवृत्ति परीक्षा (NMMS) में सफलता दिलाई। इन विद्यार्थियों को कक्षा नौवीं से बारहवीं तक प्रतिमाह 1,000 रुपये, अर्थात कुल 48-48 हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्राप्त हुई। उनके मार्गदर्शन में अब तक कुल 21 विद्यार्थी NMMS में सफलता प्राप्त कर चुके हैं।
पिछले लगभग छह वर्षों से श्री साहू अपने घर पर बच्चों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करवा रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में लोकेश्वरी साहू का केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और कुशल दीवान का सीमा सुरक्षा बल (BSF) में केंद्र सरकार की सेवा के लिए चयन हो चुका है। उनका उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता दिलाना नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और आगे बढ़ने की क्षमता विकसित करना है।
शिक्षक सुभाष कुमार साहू ने दिव्यांग बच्चों के प्रति विशेष संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें शिक्षा के साथ खेलों के लिए भी तैयार किया। मानसिक एवं शारीरिक रूप से दिव्यांग छात्रा तारणी साहू के स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता में उनके निरंतर प्रयासों से उल्लेखनीय सुधार हुआ। उनके मार्गदर्शन में तारणी साहू ने राज्य स्तरीय पैरालंपिक प्रतियोगिता में गोला फेंक, भाला फेंक और तवा फेंक में तीन स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इसी प्रकार पैरों से पूर्णतः दिव्यांग एवं चलने में असमर्थ छात्र भूपेश यादव को भी साहू ने निरंतर प्रोत्साहित और प्रशिक्षित किया। भूपेश यादव ने भी राज्य स्तरीय पैरालंपिक प्रतियोगिता में गोला फेंक, भाला फेंक और तवा फेंक में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। इन दोनों विद्यार्थियों के जीवन में शिक्षा, प्रशिक्षण और निरंतर प्रोत्साहन के माध्यम से उल्लेखनीय सकारात्मक परिवर्तन आया, जो शिक्षक सुभाष कुमार साहू की समावेशी शिक्षा और सेवाभाव का प्रेरणादायी उदाहरण है।
शिक्षक सुभाष कुमार साहू शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को विभिन्न खेलों के लिए भी प्रशिक्षित कर रहे हैं। उनके द्वारा प्रशिक्षित छात्र अक्षत साव लेजर रन एथलेटिक्स स्पर्धा में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुके हैं। बैडमिंटन में लालपुर स्कूल की छात्रा पूर्णिमा साहू राज्य स्तर तक पहुंची हैं, वहीं शिब्बू वर्मा ने संभाग स्तर तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। स्क्वैश में भी अक्षत साव ने राज्य स्तर पर प्रतिनिधित्व किया है।
साहू स्वयं भी खेलों के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने 25 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में प्री-नेशनल स्तर पर प्रतिनिधित्व किया है तथा राज्य स्तरीय 10 मीटर एयर पिस्टल टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता है। वे बैडमिंटन की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
साहू की निःशुल्क पाठशाला केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है। वे जरूरतमंद बच्चों को पुस्तकों और अध्ययन सामग्री की व्यवस्था में सहयोग करते हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाते हैं तथा उनकी समस्याओं को सुनकर समाधान का प्रयास करते हैं। लगभग छह वर्षों से लगातार जारी यह पहल शिक्षा के साथ मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
सुभाष कुमार साहू ने अपने कार्यों से यह संदेश दिया है कि बदलाव के लिए बड़े संसाधनों से अधिक आवश्यक संवेदनशीलता और संकल्प है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन में शिक्षा को सेवा से जोड़कर यह सिद्ध किया है कि शिक्षक विद्यालय के बाहर भी विद्यार्थियों के भविष्य का मार्गदर्शक बन सकता है।
