CG High Court: High Court seeks affidavit from DGP!
CG HIGH COURT: बिलासपुर हाईकोर्ट ने 34 साल पुराने एक मामले में राज्य के DGP को शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ता मनोहरलाल चौधरी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर 34 साल पुरानी FIR को रद्द करने की गुहार लगाई थी। याचिका लंबित रहने के दौरान ही पुलिस विभाग की जांच में कुछ गंभीर खामियां पाई गईं, जिसके बाद विभाग के ही तीन डीएसपी रैंक के अफसरों की भूमिका पर सवाल उठे थे।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने यह आदेश पारित किया है। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।
इस मामले में हाईकोर्ट ने पूर्व में 17 जून 2026 को आदेश जारी कर डीजीपी छत्तीसगढ़ से इन अफसरों पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी।
डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से बताया गया, कि पिछले आदेश के अनुपालन में DGP की ओर से 12 जून 2026 को एक अनुशंसा राज्य सरकार को भेजी गई है।
इसके तहत दोषी पाए गए तीन DSP के खिलाफ छोटा दंड लगाने की अनुशंसा की गई है। यह मामला फिलहाल राज्य सरकार (गृह विभाग) के समक्ष विचाराधीन है।
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पुलिस ने इस मामले की विवेचना पूरी कर, याचिकाकर्ता मनोहरलाल के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी है।
उन्होंने कोर्ट से प्रार्थना की कि उन्हें इस नई चार्जशीट को कानून के अनुसार चुनौती देने की स्वतंत्रता दी जाए। डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता की इस दलील को स्वीकार करते हुए उन्हें कानूनी प्रावधानों के तहत पेश किए गए चार्जशीट के खिलाफ अलग से उचित कानूनी उपाय तलाशने की छूट दी है।
कोर्ट ने डीजीपी को नया शपथ पत्र पेश कर यह जानकारी देने को कहा है कि उनके द्वारा 12 जून 2026 की अनुशंसा के आधार पर उन तीन डीएसपी के खिलाफ अब तक क्या अंतिम कार्रवाई की गई है।
