Shree Ram Mandir Katha: On the fourth day of Shrimad Bhagwat Mahapuran, Tankaram Verma recited a wonderful hymn.
Shree Ram Mandir Katha: श्रीराम मंदिर प्रांगण वीआईपी रोड पर आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण के चौथे दिन की कथा का शुभारंभ आचार्य हिमांशु कृष्ण भारद्वाज महाराज ने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का वर्णन करते हुए किया।
भक्तराज ध्रुव अपनी सौतेली माता की उपेक्षा को ही वरदान मान कर राज-पाट त्याग कर भगवान की खोज में निकल गए। देवर्षि नारद की कृपा से उनकी भक्ति सफल हुई।
भगवान विष्णु ने ध्रुव महाराज की प्रत्यक्ष दर्शन दिए और जीवन के संपूर्ण वैभव का वरदान पाया। आचार्य ने कहा कि ध्रुव महाराज जब राजभवन में लौटे तो सर्वप्रथम अपनी सौतेली माता सुरुचि का चरण वंदन किया और कहा कि आपके कृपा से ही मुझे ईश्वर की प्राप्ति हुई।
महाराज ने इस प्रसंग के व्यवहारिक पक्ष का वर्णन करते हुए कहा कि जीवन में जो कड़वे बोल सहता है धैर्य धारण करता है उसके जीवन की भांतियां मिट जाती है और क्रांति का उदय होता है।
उन्होंने कहा कि ध्रव की सौतेली माता सुरुचि ने उन्हें पितृ और राज पद वंचित करते हुए उसकी उपेक्षा की पर ध्रुव ने क्लेश नहीं किया और देवर्षि नारद की कृपा यानी गुरु के आशीर्वाद भक्ति के परमपद को प्राप्त किया। आज भी हम सब ध्रुव तारा के दर्शन को शुभ मानते हैं।
हिमांशु महाराज ने कहा कि मानव जीवन अवगुण से भरा है और निर्मल मन जिनका होता है केवल उसे ही भक्ति मिलती है और जीवन में निर्मलता केवल सहजता और सरलता से मिलती है।
इसलिए जीवन में हमें सदैव छल-कपट से दूर रहकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य सदैव दोहरे चरित्र में उलझा रहता है। व्यक्ति समाज अपने उस रूप और गुण का प्रदर्शन करता है जो वह होता नहीं है।
ऐसे स्थिति में भक्ति का प्राप्त करना कठिन है। इसलिए मनुष्य को चाहिए वह भीतर और बाहर यदि एक भाव से जीवन का निर्वाह करे तब ही उसके जीवन भक्ति प्रगट होगी।
उन्होंने भक्ति में बाधा मोह का वर्णन करते हुए जड़ भरत की कथा सुनाई कहा कि जड़भरत राज ऋषभ देव के पुत्र थे और भगवान के परम भक्त थे किंतु एक गर्भिणी हिरण के वत्स के मोह में ऐसा उलझे की हिरण का सावक उनके लिए सब कुछ हो गया और अंतिम समय में उन्हें हिरण की याद बनी रही जिसके कारण उनका जन्म हिरण के रूप में हुआ।
उन्होंने कहा कि जीवोदया उत्तम कार्य है पर ईश्वर के अलावा किसी अन्य बात से मोहित होने जीवन मार्ग से व्यक्ति भटक जाता है। मानव जीवन का लक्ष्य भगवान को प्राप्त करना है। जड़भरत महाराज हिरण के मोहि पर पड़ कर भक्ति को भूल गए।
गुरुवार की भागवत कथा में पहुंचे राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने महाराज को प्रणाम कर मंच पर श्याम तुझसे मिलने का ही बहाना है. भजन गाया, जिसे सुनकर श्रद्धामयी माता और पुरुष धर्मसभा में जमकर थिरकने लगे।
कैबिनेट मंत्री टंक राम वर्मा ने अपने भजन में संदेश दिया और कहा कि गुरु की कृपा के बिना भक्ति का दान नहीं मिल सकता है। आज के मंच में मेरा यह भजन गायन हिमांशु महाराज की गुरु कृपा से संभव हुआ है।

