BREAKING: DGCA implements zero tolerance policy on aircraft accidents
नई दिल्ली। देश में बढ़ते विमान हादसों को देखते हुए Directorate General of Civil Aviation (डीजीसीए) ने कड़ा रुख अपनाते हुए नए सुरक्षा नियमों का ऐलान किया है। मंगलवार को डीजीसीए ने सभी नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स के साथ हाई-लेवल मीटिंग कर हालिया दुर्घटनाओं की समीक्षा की।
डीजीसीए की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि पिछले दस साल के हादसों के डेटा का विश्लेषण किया गया। समीक्षा में सामने आया कि अधिकांश दुर्घटनाओं की वजह लिखित निर्देशों का पालन न करना, सही फ्लाइट प्लानिंग की कमी और पर्याप्त ट्रेनिंग का अभाव रहा है।
रेगुलेटर ने साफ किया है कि अब सुरक्षा को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति लागू की जाएगी। चाहे चार्टर फ्लाइट का दबाव हो, वीआईपी मूवमेंट हो या व्यावसायिक नुकसान की आशंका—सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।
डीजीसीए ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पायलट-इन-कमांड सुरक्षा कारणों से फ्लाइट को डायवर्ट, डिले या कैंसिल करता है तो उसका फैसला अंतिम माना जाएगा। ऑपरेटर को इसे स्वीकार करना होगा, भले ही इससे आर्थिक नुकसान हो।
मौसम संबंधी हादसों पर चिंता जताते हुए रेगुलेटर ने कहा कि गलत निर्णय अक्सर दुर्घटनाओं की वजह बनते हैं। अब ऑपरेटर्स को रियल टाइम वेदर अपडेट सिस्टम अनिवार्य रूप से स्थापित करना होगा और लिखित निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा।
इसके साथ ही डीजीसीए ने साफ कर दिया है कि किसी भी सिस्टम फेल्योर या लापरवाही की स्थिति में सिर्फ पायलट को दोषी नहीं ठहराया जाएगा, बल्कि संबंधित मैनेजर और सीनियर लीडर को भी सीधे जिम्मेदार माना जाएगा।
नए निर्देशों के बाद एविएशन सेक्टर में सुरक्षा मानकों को लेकर सख्ती और बढ़ने की उम्मीद है।

