MODI ISRAEL VISIT : Israeli Parliament warns of boycott before Modi’s visit
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संभावित इजरायल यात्रा से पहले वहां की घरेलू राजनीति गरमा गई है। विपक्ष के नेता यायर लैपिड ने चेतावनी दी है कि यदि परंपरा के मुताबिक इजरायल के उच्चतम न्यायालय के प्रमुख को आमंत्रित नहीं किया गया, तो वे संसद में मोदी के प्रस्तावित संबोधन का बहिष्कार करेंगे।
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी 25 फरवरी को दो दिवसीय दौरे पर इजरायल पहुंच सकते हैं। इस दौरान उनका नेसेट (इजरायली संसद) को संबोधित करने का कार्यक्रम है। यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से प्रस्तावित है। इसे भारत-इजरायल संबंधों के लिहाज से अहम दौरा माना जा रहा है।
विपक्ष का आरोप: परंपरा तोड़ रही सरकार
यायर लैपिड का कहना है कि संसद को संबोधित करने वाले किसी भी विदेशी नेता के कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के प्रमुख को आमंत्रित करना स्थापित परंपरा रही है। उनके अनुसार, मौजूदा हालात में इस परंपरा को तोड़ना राजनीतिक संदेश देने की कोशिश होगी। उन्होंने साफ कहा कि विपक्ष नहीं चाहता कि भारत के प्रधानमंत्री आधी खाली संसद को संबोधित करें।
भारतीय दूतावास भी असहज?
लैपिड ने संसद में दावा किया कि इस मुद्दे पर भारतीय दूतावास से भी चर्चा हुई है और वे भी स्थिति को लेकर असहज हैं। हालांकि, विपक्षी सूत्रों का कहना है कि यह सीधा बहिष्कार का आह्वान नहीं, बल्कि सरकार द्वारा उन्हें कठिन स्थिति में डालने की कोशिश है।
न्यायिक सुधार विवाद बना वजह
इजरायल में इन दिनों न्यायिक सुधारों को लेकर सरकार और न्यायपालिका के बीच तनाव जारी है। जनवरी 2025 में यित्जाक एमित को उच्चतम न्यायालय का अध्यक्ष चुना गया, लेकिन न्याय मंत्री यारिव लेविन ने उनके अधिकार को मान्यता देने से इनकार कर दिया। राजपत्र में नाम प्रकाशित न करने और औपचारिक मान्यता न देने का विवाद अब मोदी की यात्रा से पहले सियासी रंग ले चुका है।
भारत-इजरायल रिश्तों के लिहाज से यह दौरा अहम माना जा रहा है, लेकिन मेजबान देश की आंतरिक खींचतान ने कार्यक्रम से पहले ही राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

