CHAR DHAM ENTRY BAN : Preparations underway for entry ban in Char Dham!
उत्तराखंड, 26 जनवरी। उत्तराखंड के चारधाम को लेकर बड़ा फैसला सामने आ सकता है। बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे खोले जाएंगे, जबकि केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की घोषणा महाशिवरात्रि के दिन की जाएगी। इसी बीच चारधाम और उनसे जुड़े मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी तेज हो गई है।
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC), गंगोत्री और यमुनोत्री धाम मंदिर समितियों की ओर से सरकार को इस संबंध में प्रस्ताव भेजे गए हैं, जिस पर सरकार ने सैद्धांतिक सहमति जताई है। यदि प्रस्ताव पास होता है तो चारधाम के अलावा मंदिर समितियों के अधीन आने वाले 46 अन्य मंदिरों में भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लग सकती है।
BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि बद्रीनाथ और केदारनाथ समेत समिति के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन का प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। बैठक में तीर्थ पुरोहित और धर्माधिकारी भी शामिल होंगे।
इससे पहले गंगोत्री मंदिर समिति ने बैठक कर गंगोत्री धाम और गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं की एंट्री रोकने के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति बनाई है। समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने स्पष्ट किया कि सिख धर्म को सनातन परंपरा की शाखा मानते हुए उन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। वहीं यमुनोत्री धाम मंदिर समिति ने भी गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक का प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
गैर-हिंदू की परिभाषा को लेकर BKTC अध्यक्ष ने साफ किया कि जिनकी सनातन धर्म में आस्था नहीं है, वे इसके दायरे में आएंगे। जो लोग सनातन परंपरा में विश्वास रखते हैं, उनके लिए चारधाम खुले रहेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार तीर्थ पुरोहितों, संत समाज और धार्मिक संगठनों की राय के आधार पर ही अंतिम फैसला लेगी। साथ ही पहले से बने कानूनों का अध्ययन किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि यह फैसला सीधे देशभर से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को प्रभावित कर सकता है। 2025 के यात्रा सीजन में केदारनाथ धाम में करीब 16.56 लाख और बद्रीनाथ धाम में लगभग 16.5 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे।
गौरतलब है कि बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का गठन यूपी श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ टेंपल एक्ट 1939 के तहत हुआ है। इसी कानून के तहत समिति को बायलॉज बनाने और मंदिर संचालन से जुड़े नियम तय करने का अधिकार प्राप्त है। हालांकि प्रस्ताव पास होने के बाद उसे लागू करने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी और अधिसूचना जरूरी होगी।
फिलहाल बोर्ड बैठक का इंतजार है। ऐसे में चारधाम यात्रा की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए आने वाले दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं।

