कवर्धा: जिला मुख्यालय में एसपी कार्यालय से लेकर भोजली तालाब तक का पूरा मार्ग अवैध कब्जों की भेंट चढ़ चुका है, जहां फुटपाथ पर खुलेआम अवैध थैली दुकानों और ठेलों का कब्जा है। हालात इतने भयावह हैं कि पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ नाम की कोई चीज़ बची ही नहीं, मजबूरी में लोग सड़क पर चल रहे हैं और रोज़ कोई न कोई एक्सीडेंट हो रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा क्षेत्र प्रशासनिक कार्यालयों के बेहद नज़दीक है, इसके बावजूद नगर पालिका और जिला प्रशासन आंख मूंदकर बैठे हुए हैं। सवाल यह है कि क्या किसी बड़े हादसे या मौत के बाद ही प्रशासन जागेगा?
फुटपाथ पर दुकानें, सड़क पर जनता
फुटपाथ पर अवैध कब्जे के कारण:
- बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सड़क पर चलने को मजबूर
- दोपहिया और चारपहिया वाहनों से लगातार टकराव
- ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था रोज़मर्रा की समस्या
एक्सीडेंट के बाद भी कोई स्थायी कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद नगर पालिका सिर्फ दिखावटी कार्रवाई कर फोटो खिंचवाकर शांत बैठ जाती है, और दूसरे ही दिन वही अवैध दुकानें दोबारा लग जाती हैं।
प्रशासन की लापरवाही या मिलीभगत?
यह सवाल अब आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है कि
- क्या यह लापरवाही है?
- या फिर अवैध कब्जाधारियों को किसी का संरक्षण प्राप्त है?
- क्योंकि अगर इच्छाशक्ति हो, तो एक दिन में पूरा फुटपाथ खाली कराया जा सकता है।
कानून क्या कहता है?
- नगर पालिका अधिनियम और सड़क सुरक्षा नियमों के अनुसार:
- फुटपाथ पर किसी भी प्रकार का व्यावसायिक कब्जा अवैध है
- पैदल यात्रियों की सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है
- एक्सीडेंट की स्थिति में प्रशासन भी जिम्मेदार माना जा सकता है
जनता की मांग
शहरवासियों की मांग है कि:
- एसपी ऑफिस से भोजली तालाब तक तत्काल अतिक्रमण हटाया जाए
- स्थायी निगरानी और जुर्माने की व्यवस्था हो
- फुटपाथ को चलने योग्य बनाया जाए
- जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाए
अगर अब भी नगर पालिका और जला प्रशासन नहीं चेते, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि हर आने वाला हादसा प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम होगा।
पत्रकार दीपक तिवारी कवर्धा
