DELHI RIDGE PROTECTION : Supreme Court strict on Delhi Ridge, major order to the Centre
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के “ग्रीन फेफड़ों” कहे जाने वाले रिज क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड (Delhi Ridge Management Board – DRMB) को वैधानिक दर्जा (Statutory Status) दिया जाए, ताकि यह संस्था रिज क्षेत्र की सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े सभी मामलों में प्रभावी भूमिका निभा सके।
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि रिज और मॉर्फोलॉजिकल रिज क्षेत्रों से जुड़े सभी पर्यावरणीय एवं विकास संबंधी मामलों के लिए डीआरएमबी को “सिंगल विंडो अथॉरिटी” के रूप में काम करना होगा। अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि रिज और मॉर्फोलॉजिकल रिज क्षेत्रों से सभी अतिक्रमण हटाए जाएं और वहां किसी भी नई निर्माण गतिविधि पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
रिज की पारिस्थितिकी बचाना अनिवार्य
अदालत ने कहा कि यदि रिज क्षेत्र को कानूनी संरक्षण और प्रभावी शासन नहीं मिला, तो दिल्ली की पारिस्थितिकी गंभीर रूप से प्रभावित होगी। रिज क्षेत्र वायु प्रदूषण नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण और तापमान संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
तीन प्रमुख बिंदुओं पर फैसला
पीठ ने अपने आदेश में तीन मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया :
वन अधिनियम के तहत दिल्ली रिज की अंतिम अधिसूचना जारी करना।
रिज और मॉर्फोलॉजिकल रिज से अतिक्रमण हटाना।
मॉर्फोलॉजिकल रिज की वैज्ञानिक रूप से पहचान और सीमांकन करना।
तीन दशक से लंबित कार्रवाई पर नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि 1996 से अब तक रिज की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। अदालत ने कहा कि तीन दशक बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है और रिज क्षेत्र पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण जारी है।
क्या है मॉर्फोलॉजिकल रिज?
मॉर्फोलॉजिकल रिज वह क्षेत्र है जिसे आधिकारिक रूप से वन भूमि घोषित नहीं किया गया है, लेकिन उसकी पारिस्थितिक संरचना रिज क्षेत्र जैसी ही होती है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे भी समान रूप से संरक्षण देने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि फरवरी 2023 में शुरू की गई मॉर्फोलॉजिकल रिज की पहचान और सीमांकन प्रक्रिया को पूरा किया जाए और इसकी रिपोर्ट अदालत को सौंपी जाए।

