’15 रुपये में 7 पूड़ी और भाजी’… भारतीय रेलवे की किफायती स्कीम सोशल मीडिया पर वायरल

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नई दिल्ली। इंडियन रेलवे कैटरिंग और टूरिज्म कॉर्पोरेशन ने पिछले साल भारतीय रेलवे के साथ मिलकर यात्रियों, खास तौर पर जनरल क्लास कोच में यात्रा करने वालों को किफायती दामों पर स्वच्छ भोजन और नाश्ता उपलब्ध कराया था। 15 रुपये की कीमत पर उपलब्ध यह इकॉनमी मील बजट के प्रति जागरूक यात्रियों के लिए एक बुनियादी लेकिन संतोषजनक विकल्प है।

15 रुपये में मिलने वाले खाने में क्या मिलता है, इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोग इसको लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जनता का खाना नाम से शेयर किए गए वीडियो में दिखाया गया है कि एक डिब्बे में सात पूड़ियों और भाजी के साथ अचार भी है। इस पहल के पीछे उद्देश्य यात्रियों को यात्रा के दौरान सस्ता और पेट भरने वाला भोजन उपलब्ध कराना है। इसके अलावा, इसी भोजन का 20 रुपये वाला विकल्प भी उपलब्ध है, जिसके साथ 300 मिलीलीटर पानी की बोतल मिलती है।

वीडियो को मिल चुके हैं 8 लाख व्यूज

शेयर किए जाने के बाद से, इस वीडियो को 8 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पहल पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और भोजन की सुविधा और गुणवत्ता की सराहना की है।

सोशल मीडिया यूजर्स ने की खाने की तारीफ

एक यूजर ने लिखा, “ईमानदारी से कहूं तो इस कीमत में यह अच्छा लग रहा है, हर रेलवे स्टेशन पर यह उपलब्ध होना चाहिए।”
एक और यूजर ने लिखा, “यह उन लोगों के लिए अच्छा है जिनके पास समय की कमी है, जिनके पास कम पैसे हैं या जो अन्यथा भोजन का खर्च नहीं उठा सकते।”

तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, “सिर्फ 15 रुपये में पूरा खाना – अब ऐसी ही होनी चाहिए सार्वजनिक सेवा! जनता के खाने की एक छोटी सी कीमत है जिसका बड़ा प्रभाव है, यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। थाली में गरिमा लाने के लिए भारतीय रेलवे को बधाई।”

एक अन्य यूजर ने कहा, “अच्छी पहल! हमें यह समझने की जरूरत है कि रेलगाड़ियां यात्रा के लिए होती हैं, वे पहियों पर चलने वाले 5 सितारा रेस्तरां नहीं हैं। अगर आपको खाने की इतनी ही चिंता है, तो इसे अपने घर से ही लाएं।”

हालांकि, कुछ यूजर्स ने भोजन की आलोचना भी की, उनका कहना था कि भोजन औसत दर्जे का और घटिया क्वालिटी वाला है। एक यूजर ने कहा, “भारतीय रेलवे में भोजन की मात्रा में कोई समस्या नहीं है; असली समस्या क्वालिटी की है।”

एक अन्य ने टिप्पणी की, “पता नहीं यह चीज क्यों दी जाती है। यह किसी भी तरह से स्वस्थ कैसे हो सकती है, स्वच्छ और ताजा तो छोड़ ही दीजिए।”

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