VIDEO : भाजपा का एकमात्र चुनावी एजेंडा “श्रीराम” और “हिन्दुत्व” भूपेश ने छीना …

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VIDEO: BJP’s only election agenda “Shriram” and “Hindutva” was snatched by Bhupesh …

रायपुर। छत्तीसगढ़ के आगामी विधानसभा चुनाव के उठा-पटक के बीच भाजपा के हिंदुत्व के मुद्दे पर कांग्रेस भारी पड़ती दिखाई दे रही हैं। भाजपा के एकमात्र हिंदुत्व और श्री राम को भूपेश ने छीन लिया है। क्या कांग्रेस भाजपा की तरह विकास और योजनाओं की अपेक्षा करने लगी हैं ? और “राम” नाम से “चुनावी नाईया” पार करना चाहती हैं।

राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का भव्य आयोजन –

दरअसल, छत्तीसगढ़ में रायगढ़ संस्कृतिधानी के नाम से मशहरू है। रायगढ़ ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर को संजोकर रखने के लिए सुप्रसिद्ध है। कला नगरी के नाम से मशहूर रायगढ़ की अपनी अलग पहचान है। रायगढ़ की पहाड़ियों पर रामनमी संस्कृति के लोग उस स्थान पर पहुंचकर हर साल पूजा अर्चना करते हैं। रामायण महोत्सव के कारण रायगढ़ की फिजा में राम धुन सुनाई दे रही है। वहीं, अब रायगढ़ राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के ऐतिहासिक कार्य के लिए भी जाना जाएगा। आयोजन के दौरान बड़े-बड़े कलाकारों को न्यौता दिया गया है। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से सभी राजनैतिक लोगों को भी बुलाया गया है।

हिंदुत्व की राह पर भूपेश बघेल –

चुनावी साल में छत्तीसगढ़ सरकार हिंदुत्व की राह पर चल रही है। रामायण महोत्सव के जरिए भूपेश सरकार अपना नफा नुकसान देख रही है। इसके साथ ही राम से जुड़ी जगहों को संवारने की कोशिश में सरकार लगातार लगी हुई है। सीएम भूपेश बघेल ने कुछ दिन पहले एक पोस्टर ट्विटर पर शेयर किया था, जिसमें लिखा है कि “‘विद्यावन गुनी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर” और आज एक वीडियो जारी किया हैं।

सीएम का वीडियो –

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा राष्ट्रीय रामायण महोत्सव को लेकर एक वीडियो जारी किया गया हैं, जिसमें मुख्यमंत्री स्वयं श्रीराम का गुणगान करते नजर आ रहे हैं, जिसमें सीएम रायगढ़ में होने वाली राष्ट्रीय रामायण महोत्सव (01 जून से 03 जून) की आगामी प्रतियोगिता की भव्यता का बखान कर रहे हैं। क्या ये भगवान राम के प्रति कांग्रेस का चुनावी प्रेम हैं ? आखिर क्यों चुनाव के समय ही इन राजनेताओं को भगवान याद आते हैं। कर्नाटक में स्वयं पीएम मोदी ने “जय बजरंगबली” के नारे लगाएं, वहां उनका एजेंडा साफ था, लेकिन इसका फायदा कांग्रेस को मिला।

भाजपा को एकमात्र एजेंडे पर कांग्रेस का कब्जा –

भाजपा छत्तीसगढ़ में ही नहीं बल्कि पूरे देश में केवल हिन्दुत्व के एजेंडे पर काम करती हैं। आगामी दिनों छत्तीसगढ़ में भाजपा “हिंदुत्व” के आधार पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। सीएम भूपेश ने चुनाव से पहले उनका यह सपना लगभग तोड़ दिया है और राम-राम जप रहे हैं। सरकार के विज्ञापनों में खुलकर इस तरह की बातें सामने आने लगी हैं। छत्तीसगढ़ में आने वाला वक्त बताएंगा कि “भांजा राम” किस पर अपनी दया-दृष्टि बनाते हैं। हालांकि, भूपेश का पड़ला भारी लग रहा है।

राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन रायगढ़ में क्यों ? –

राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन रायगढ़ में हो रहा है। इसकी मुख्य वजह क्योंकि यह रायगढ़ के इतिहास से भी बड़ा जुडाव रखता है। यहां की पहाड़ियों पर आज भी रामराज्य की गाथा गाती हैं। यह शैल चित्र धर्मजयगढ़ विकासखंड से 8 किलोमीटर दूर ओंगना की पहाड़ियों पर है। यहां के शैल चित्रों में दस सिर वाला व्यक्ति भी है, जो कि युद्ध करता दिखाई देता है।

रायगढ़ की पहाड़ियों में हजारों वर्ष पुराने शैल चित्र –

शैल चित्र प्राचीन कालीन समाज और जीवनशैली को बताता है। रायगढ़ के पहाड़ियों में बड़ी-बड़ी चट्टानों पर रामराज का इतिहास है। हजारों वर्ष पूर्व बने ओंगना पहाड़ी के इन शैलाश्रयों में बने चित्र जनश्रुतियों के अनुसार तब के समाज में रामायण के प्रभाव को दिखाने का काम करते हैं। यह शैल चित्र रामायण की गाथा पीढ़ियों से बता रही है।

01 से 03 जून तक प्रदेश का पहला राष्ट्रीय रामायण महोत्सव –

रायगढ़ के रामलीला मैदान में 01 से 03 जून तक प्रदेश का पहला राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इसमें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान देश-विदेश की मंडलियां रामायण के अरण्य काण्ड पर प्रस्तुति देंगी। इस विराट आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से की जा रही है। रामायण प्रसंग के मंचन के साथ ही कार्यक्रम में हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ और केलो महाआरती और दीपदान का कार्यक्रम भी आयोजित है।

छत्तीसगढ़ में देश का इकलौता कौशल्या माता मंदिर –

भगवान राम का ननिहाल जिसे छत्तीसगढ़ के नाम से जाना जाता है। छत्तीसगढ़ की धरा से भगवान के राम के जुड़ाव के कई बाते सामने आई हैं। छत्तीसगढ़ को भगवान श्री राम की माता कौशल्या की जन्मभूमि माना जाता है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में उन्हें “भांजे” का दर्जा प्राप्त है। इतना ही नहीं प्रदेश में “माता कौशल्या” को आराध्य माता माना गया है। चंदखुरी में देश का इकलौता कौशल्या माता का मंदिर निर्मित है।

 

 

 

 

 

 

 

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