किंग्स ऑयल की एमआरपी घटी:किराना दुकान संचालक 170 रुपए से ज्यादा में किंग्स सोयाबीन तेल नहीं बेच सकेंगे

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अब किराना दुकान संचालक 170 रुपए से ज्यादा में किंग्स सोयाबीन तेल नहीं बेच सकेंगे। किंग्स तेल ने अपनी एमआरपी घटा दी है। जिस एक लीटर वाले पैकेट में कुछ दिनों पहले तक 210 रुपए एमआरपी था, उसमें अब 170 रुपए कर दिया गया है। एमआरपी ज्यादा होने की वजह से दुकानदार अनाप शनाप कीमत वसूल रहे थे।

 16 मई के अंक में- ‘मुनाफाखोरी हो सके इसलिए 160 के पैकेट में 210 रुपए किए प्रिंट’, हेडिंग से खबर प्रकाशित की। इसमें बताया कि किंग्स सोयाबीन के एक लीटर का पैकेट थोक विक्रेता 160 रुपए में बेच रहे हैं, जबकि चिल्हर दुकानदार अपने ग्राहकों से इस पैकेट के 170 से 180 रुपए तक वसूल रहे हैं।

दरअसल पैकेट में एमआरपी 210 है। इसी का फायदा उठाकर दुकानदार ग्राहकों से ज्यादा कीमत वसूल रहे हैं। वे यह कहते हैं कि एमआरपी से कम में दे रहे हैं। दरअसल कंपनियों से ही एमआरपी 50 रुपए ज्यादा प्रिंट होकर आ रहा है जिसका फायदा दुकानदार उठा रहे हैं। माना जा रहा है कि यह जानबूझकर किया जा रहा है ताकि दुकानदार मुनाफाखोरी कर सके और तेल के रेट बढ़ने पर भी बेचने से न हिचकिचाए। खबर में यह भी बताया कि एक ही मोहल्ले में एक ही कंपनी के तेल के दाम अलग-अलग हैं।

पर सभी का ध्यान ज्यादा मुनाफाखोरी पर है। खबर प्रकाशित होने के बाद कंपनी ने तेल की नई पैकेजिंग में एमआरपी को घटा दिया है। एक लीटर वाले तेल के नए पैकेट में एमआरपी 170 रुपए है। हालांकि अभी भी 170 रुपए में बेच रहे हैं पर एमआरपी दिखाकर वे जो अधिक कीमत वसूलते थे, अब नहीं कर पाएंगे। इधर फार्च्यून प्लस में पहले की तरह 195 रुपए तो महाकोष में 183 रुपए एमआरपी है।

तेल के दाम प्रति लीटर 5 से 6 रुपए घटे पर लोगों को राहत नहीं
चाहे किंग्स सोयाबीन ऑयल हो, फार्च्यून प्लस हो या फिर महाकोष, सभी तेल के दाम में मामूली कमी आई है। 160 रुपए पैकेट वाला किंग्स सोयाबीन ऑयल 154 से 155 रुपए में थोक में मिल रहा है। महाकोष तेल भी 155 रुपए में मिल रहा है। फार्च्यून के दाम 6 रुपए प्रति लीटर घट चुका है।

पहले यह 175 रुपए था जो 169 रुपए हो गया है। हालांकि दाम घटने का फायदा आम आदमी को नहीं मिल रहा है। चिल्हर विक्रेता अभी भी 170 रुपए में किंग्स और महाकोष को तो 175 से 180 रुपए में फार्च्यून प्लस को बेच रहे हैं। अधिकारियों को दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की फुर्सत नहीं है। यहीं वजह है कि दुकानदारों के हौसले बुलंद है। शहर के आउटर और ग्रामीण इलाकों में तेल के दाम ज्यादा वसूल किए जा रहे हैं।

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