WORLD BANK WARNED INDIA : वर्ल्ड बैंक ने भारत को दी चेतावनी

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WORLD BANK WARNED INDIA: World Bank warned India

नई दिल्ली। वर्ष 2047 तक विकसित देशों की श्रेणी में खड़ा होने की कोशिश में जुटे भारत को विश्व बैंक ने कड़वी घूंट दे दी है। विश्व बैंक का कहना है कि विकसित देश बनने के लिए भारत के पास बहुत कम समय है और इस दौरान उसे कई बड़े सुधारों को अंजाम देना होगा। अगर भारत ऐसा नहीं कर पाता है तो उसे अमेरिका की मौजूदा इकोनॉमी के एक चौथाई बनने में ही 75 वर्ष लग जाएंगे।

हालांकि यह टिप्पणी विशेष तौर पर प्रति व्यक्ति आय के संदर्भ में है। निवेश बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी अकुशलता व अक्षमता को विकसित देश बनने की राह में दो सबसे अहम काम के तौर पर चिन्हित करते हुए विश्व बैंक ने यह भी कहा है कि भारत लगातार एक कम आय वाले वर्ग वाले समूह में शामिल है, जबकि विगत 34 वर्षों में 34 देशों ने मध्य आय वाले वर्ग से उच्च आय वाले वर्ग में अपनी जगह बना ली है। कम आय वाले देशों के लिए बढ़ी चुनौतियांविश्व बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट इंद्रमीत गिल ने अपनी एक रिपोर्ट उद्योग चैंबर सीआईआई के ग्लोबल इकोनॉमिक पॉलिसी फोरम कार्यक्रम में पेश की। गिल ने अपनी प्रजेंटेशन में बताया कि पिछले दो-ढ़ाई दशकों का डाटा बताता है कि कम आय वाले देशों के लिए आर्थिक प्रगति करना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। भू-राजनैतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है, कोराबार के संरक्षण को लेकर विकसित देशों का रवैया कड़ा होता जा रहा है, नीतिगत अस्थिरता है, ब्याज दरें ज्यादा है, प्राकृतिक आपदाएं ज्यादा हो रही हैं।

विश्व बैंक की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में प्रति व्यक्ति आय 37683 डॉलर था, जबकि उसी वर्ष भारत में आय 2393 डॉलर थी। ऐसे में भारत भी लगातार कम मध्यम आय वाले देशों (प्रति व्यक्ति आय 1136 से 4465 डॉलर) की श्रेणी में बना हुआ है। इसमें दुनिया की प्रमुख विकासशील देशों के डाटा के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि अगर बड़े सुधार नहीं किये जाते हैं तो अमेरिकी आय का 25 फीसद स्तर हासिल करने में भारत को 75 वर्ष लग जाएंगे। भारत पर बढ़ा कर्ज का बोझमध्यम आय वाले वर्ग के देशों के बारे में कहा गया है कि इनके पास पूंजी भी कम है और पूंजी के इस्तेमाल की इनकी क्षमता भी खास नहीं है। इन देशों पर बढ़ते कर्ज के बोझ को एक बड़ी चुनौती के तौर पर भी पेश किया गया है। बताते चलें कि भी भारत पर भी विदेशी कर्ज का बोझ कोविड के बाद काफी तेजी से बढ़ा है।

भारतीय इकोनॉमी की इस स्थिति के लिए चीफ इकोनॉमिस्ट गिल की रिपोर्ट में तीन कारण बताये गये हैं।
पहला- भारत में काफी ज्यादा गैर उत्पादक कंपनियां कारोबार में हैं।
दूसरा- महिलाओं को लगातार श्रम बाजार से अलग रखा गया है।
तीसरा- भारत में ऊर्जा की लागत काफी ज्यादा है।

तेजी से विस्तार नहीं करती कंपनियांभारतीय कंपनियों के बारे में कहा गया है, जो सक्षम हैं, वह तेजी से विस्तार नहीं करती और जो अक्षम हैं, उन्हें कारोबार से बाहर करना मुश्किल है। विकसित भारत बनने के लक्ष्य को आपात स्थिति के तौर पर लेने का सुझाव दिया गया है। भारत के पक्ष में घरेलू व वैश्विक स्थिति की बात भी स्वीकार की गई है, लेकिन यह भी कहा गया है कि बहुत ज्यादा समय नहीं है। प्रतिभाओं को पुरस्कृत करने और क्षमता में सुधार को एक प्रमुख कारक के तौर पर चिन्हित किया गया है, जिसका व्यापक असर होगा। जिस तरह से अमेरिका ने 60-70 के दशक में सभी को बराबरी का अवसर दिया वैसा ही भारत को करना होगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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