ईडी बताती क्यों नहीं? कितनी सम्पत्ति, कितने कैश मिले

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले तीन दिन से फिर ईडी की टीम लगातार अफसरों, कारोबारियों के यहां छापेमारी की कार्रवाई कर रही है। ईडी ने आईएएस समीर विश्नोई और दो कारोबारियों को गुरुवार को गिरफ्तार भी कर लिया। इस पूरी कार्रवाई पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जमकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि ईडी छापों के बाद बताती क्यों नहीं कि कहां कितना कैश मिला, संपत्ति मिली, क्या गड़बड़ी मिली। ये छापे भाजपा हमें डराने-झुकाने के लिए करवा रही है, लेकिन हम डरेंगे नहीं। भेंट-मुलाकात कार्यक्रम से वापस लौटे सीएम बघेल ने मीडिया से कहा कि, ईडी को भाजपा सरकार के समय हुए घोटाले क्यों नहीं दिख रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के कार्यकाल में जो सबसे बड़ा नान घोटाला हुआ उसकी जांच क्यों नहीं कर रही है। जिसमें साफ दस्तावेज है कि सीएम और सीएम मैडम के नाम पर करोड़ों रुपए का लेनदेन लिखा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि, रमन सिंह ईडी के प्रवक्ता बने घूम रहे हैं। उन्हें बताना चाहिए कि, किसके घर क्या मिला। 40 घंटे में गिन नहीं पा रहे हैं क्या। और जांच करना है, तो पनामा घोटाले की क्यों नहीं हो रही है। उसमें रमन सिंह और उनके लड़के का साफ नाम है। बताना चाहिए कि 10 साल में उनकी आय कैसे बढ़ गई। केंद्रीय एजेंसी गैर भाजपा राज्यों में ही भेजी जा रही है। भूपेश बघेल बोले कि हर चुनाव से पहले यहां ईडी का छापा होता है। उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले ईडी आई थी फिर असम चुनाव से पहले भी छापा मारा गया, अब हिमाचल प्रदेश में चुनाव है तो फिर छापे पड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में जब चुनाव होगा तो लगता है कि ये लोग यहीं रह जाएंगे। माइनिंग विभाग में पहुंची ईडी की टीम कलेक्टर रानू साहू के बंगले में जांच के एक दिन बाद गुरुवार को कम्पोजिट बिल्डिंग स्थित माइनिंग ऑफिस में दबिश दी गई। इसके पहले कम्पोजिट बिल्डिंग को सीआरपीएफ की टीम ने अपने घेरे में ले लिया था। अधिकारी माइनिंग ऑफिस के अधिकारियों की टीम दस्तावेज खंगाल रही है। 8 दिन की रिमांड पर आईएएस समीर विश्नोई और दोनों कारोबारीछत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय-ईडी की छापेमारी के बाद पहली बड़ी कार्रवाई हुई है। ईडी ने चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी औरआईएएस अधिकारी समीर विश्नोई को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया। जहां 8 दिन की रिमांड मंजूर हो गई है। दोनों कारोबारियों को भी 8 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। हालांकि ईडी की टीम ने 14 दिन की रिमांड मांगी थी। कोर्ट ने अपने फैसले में सुनाया है कि, पूछताछ रायपुर में वकीलों की मौजूदगी में होगी। लेकिन संपर्क नहीं कर सकते. प्रत्येक दो दिनों में एक घंटे वकील से मुलाकात कराई जाएगी। ईडी ने कोर्ट में बताया है कि, समीर विश्नोई के घर में 4 किलो सोना और 20 कैरेट हीरा मिला है। इसके साथ 47 लाख रुपए कैश मिला। इस रिमांड का विरोध करने कुछ नामी वकील भी आरोपियों की तरफ से कोर्ट में बहस किए। ईडी के पास जब्त सोना की कीमत 2 करोड़ 20 लाख रुपए बताई जा रही है। इधर बचाव पक्ष ने ईडी की कार्रवाई को गलत बताया है। गिरफ्तारी को भी अवैध बताया है। उनका कहना है कि आय से अधिक संपत्ति का मामला तो आईटी का है। इसमें ईडी का क्या काम? आईएएस समीर विश्नोई को कोर्ट में पेश करने से पहले मेकाहारा में उनका मेडिकल चेकअप भी कराया गया। उनके अलावा कारोबारी सुनील अग्रवाल, लक्ष्मीकांत तिवारी की गिरफ्तारी हुई है। बताया जा रहा है कि, नवनीत तिवारी को भी हिरासत में लिया गया है। इन सभी पर कोयला कारोबारियों से अवैध लेनदेन और आय से अधिक संपत्ति जैसे आरोप हैं। माइनिंग विभाग में पहुंची ईडी की टीम कलेक्टर रानू साहू के बंगले में जांच के एक दिन बाद गुरुवार को कम्पोजिट बिल्डिंग स्थित माइनिंग ऑफिस में दबिश दी गई। इसके पहले कम्पोजिट बिल्डिंग को सीआरपीएफ की टीम ने अपने घेरे में ले लिया था।अधिकारी माइनिंग ऑफिस के अधिकारियों की टीम दस्तावेज खंगाल रही है। ईडी की एक बड़ी टीम ने सीआरपीएफ के सुरक्षा घेरे के साथ मंगलवार तड़के छत्तीसगढ़ के कई जिलों में फैले 40 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इनमें रायगढ़ कलेक्टर रानू साहू का सरकारी आवास भी शामिल था। उसके अलावा खनिज विभाग के संचालक आईएएस जेपी मौर्या, चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी समीर विश्नोई, पूर्व विधायक अग्नि चंद्राकर सहित कोयला और परिवहन कारोबार से जुड़े तमाम व्यापारियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट के यहां छापा पड़ा। रायगढ़ में रानू साहू नहीं मिली तो एजेंसी ने उनके सरकारी आवास को सील कर दिया था। बताया जा रहा है, एजेंसी ने बुधवार तक छापे की कार्रवाई पूरी कर लिया था। दोपहर बाद आईएएस समीर विश्नोई, उनकी पत्नी और दूसरे कारोबारियों को ईडी ने पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया। बाद में विश्नोई की पत्नी को छोड़कर बाकी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने की तैयारी है। बताया जा रहा है, श्वष्ठ रायगढ़ कलेक्टर रानू साहू से भी पूछताछ करेगी। उनकी मौजूदगी में उनके सरकारी आवास का सील खोलकर तलाशी भी ली जाएगी। हालांकि अभी तक ईडी ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। आरक्षक के घर दबिश, पूछताछ के बाद रात 2 बजे छोड़ा छत्तीसगढ़ में तीन दिनों से ईडी की कार्रवाई जारी है। ईडी ने गुरुवार को आरक्षक अमित दुबे के भिलाई स्थित घर पर दबिश दी। शांतिनगर वार्ड-14 निवासी आरक्षक अमित दुबे को पूछताछ के लिए रायपुर ले गई। ईडी की टीम ने गुरुवार व शुक्रवार की रात 2 बजे उसे छोड़ दिया। सूत्र बताते है कि अमित के घर से ईडी के हाथ कुछ भी नहीं लगा है। बता दें छत्तीसगढ़ में तीन दिनों से ईडी ने डेरा डाल रखा है। कलेक्टर से लेकर बिजनेसमैन के घर और दफ्तरों में छापामार कार्रवाई चल रही है। इसी तारतम्य में अधिकारियों से जुड़े कुछ दस्तावेज खंगालने ईडी अमित के घर पर पहुंची। टीम ने पूरे घर की तलाशी ली। इसके बाद पंचनामा तैयार कर रात में अमित को अपने साथ में रायपुर ले गई थी। वहां भी 2 से 3 घंटे तक दस्तावेजों के बारे में पूछताछ की गई। अंत में रात 2 बजे उसे छोड़ दिया गया। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किए गए आईएएस अधिकारी समीर विश्नोई ने एजेंसी पर मामला गढ़कर फंसाने का आरोप लगाया है. उधर विश्नोई की पत्नी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात कर ईडी के जबरदस्ती परेशान करने की शिकायत की है। उन्होने डीजीपी को पत्र लिखकर ईडी के अधिकारियों पर फंसा देने की धमकी देकर दस्तावेजों में हस्ताक्षर करवाने की बात कही है. उन्होंने बताया कि देवेंद्र नगर के आफिसर्स कॉलोनी स्थित उनके निवास में 11 अक्टूबर को लगभग सुबह 5.30 से 6.00 बजे के मध्य लगभग 15-20 लोग अचानक मेरी बिना अनुमति व सहमति में प्रवेश कर लिया. पूछने पर उन्होंने बिना कोई जवाब दिए घर के सामान को उलट-पुलट करने लगे, उसी समय मेरे पति भी पहुंच गए. उनके पूछने पर एक व्यक्ति ने अपना नाम ऋ षि वर्मा बताते हुए ईडी विभाग से आने की बात कही। इस पर हमने आने की वजह पूछने पर उन लोगों ने हमारे साथ बदतमीजी करते हुए मुझसे और मेरे पति से मोबाइल फोन ले लिया। हमने ऋ षि वर्मा एवं उसके सहयोगियों से विधिवत तरीके से ईसीआईआर और शेड्यूल एफआईआर की कापी देने की बात कही। इस पर उन्होंने इसको देने के लिये बाध्य नहीं होने की बात कहते हुए मुझसे एवं मेरे पति से घर में दबाव डालकर कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर लिये गए। इसके पश्चात अगले दिन 12 अक्टूबर को ऋ र्षि वर्मा एवं उनके साथी मुझे और मेरे पति को अपने वाहन में ले जाने लगी। इस पर ऋ षि वर्मा एवं उनके सहयोगियों से हमने आग्रह किया, कि घर में दो छोटे-छोटे बचे के लिए कोई नहीं हैं। इस पर भी हमारी बात नहीं सुनते हुए हमें जबरन पचपेढ़ीनाका स्थित आफिस में ले जाया गया। ऑफिस में उन लोगों ने मुझे एवं मेरे पति पर जबरन दबाव डालते हुए कहा कि हम जो बात बोल रहे हैं, वैसी ही बात आपको जेडी सर और आहूजा सर को बयान देकर बताना होगा. बयान देने से इंकार करने पर ऋ षि वर्मा और उसके सहयोगियों ने बताये अनुसार बयान नहीं देने पर तुम लोगों और तुम्हारे परिवारवालों को जिंदगी भर के लिये जेल में सड़ा देने की धमकी दी। इस पर मैं और मेरे पति अत्यंत भयभीत हो गए।

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