क्या से क्या हो गया : तालिबान राज में पकौड़े बेचने को मजबूर पत्रकार …

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What happened to what happened: Journalists forced to sell pakodas under Taliban rule …

काबुल। तालिबान के सत्ता में आने के बाद से पूरे अफगानिस्तान की किस्मत बदल गई है। लगभग एक साल होने को है, लेकिन अफगानिस्तान की स्थिति में कोई सुधार नहीं है। लोग भारी गरीबी का सामना कर रहे हैं। अफगानिस्तान से लगातार तालिबानी फरमान की खबरें भी आती रहती हैं, जिनमें कभी महिलाओं को ड्राइविंग से रोकना तो कभी उनका चेहरा छुपाना शामिल है। लेकिन अब अफगानिस्तान के खराब हालातों में एक पत्रकार भी फंस गए हैं।

हाल ही में अफगानिस्तान की सड़कों पर एक शख्स को पकौड़े बेचते हुए देखा गया। इस शख्स की फोटो जैसे ही इंटरनेट पर आई तो तहलका मच गया। ये व्यक्ति कोई और नहीं, पूर्व न्यूज एंकर और रिपोर्टर मूसा मोहम्मदी थे। हामिद करजई सरकार में काम कर चुके कबीर हकमाल ने ये तस्वीर ट्वीट करते हुए ये दिखाया कि अफगानिस्तान में तालिबान राज में पत्रकारों का हाल क्या है।

सड़क किनारे पकौड़ा बेचने को मजबूर

कबीर ने कहा कि तालिबानी राज में मूसा को गरीबी में धकेल दिया गया। मूसा के सड़क किनारे पकौड़े बेचने और उनके न्यूज एंकरिंग के दिनों की तस्वीर ट्वीट करते हुए हकमाल ने लिखा, ‘तालिबान राज में पत्रकारों का जीवन। मूसा मोहम्मदी ने कई साल अलग-अलग न्यूज चैनल में एंकर और रिपोर्टर का काम किया है और अब उनके पास अपने परिवार का पेट भरने के लिए कोई चारा नहीं है, इस कारण वह सड़क किनारे पकौड़े बेच रहे हैं। गणराज्य के पतन के बाद अफगानिस्तान भयंकर गरीबी झेल रहा है।’

मूसा को फिर से मिलेगी नौकरी

हकमाल के इस ट्वीट को बड़ी संख्या में लोगों ने रीट्वीट किया। ये ट्वीट इस्लामी अमीरात अफगानिस्तान के सांस्कृतिक आयोग के खुफिया और उप प्रमुख और राष्ट्रीय रेडियो और टेलीविजन के महानिदेशक अहमदुल्ला वसीक तक पहुंचा। जिस पर उन्होंने उर्दू में ट्वीट कर लिखा कि मूसा को रोजगार दिया जाएगा। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रीय रेडियो ओर टेलीविजन में उन्हें रोजगार मिलेगा। हकमाल का ट्वीट मूसा के लिए राहत भरी खबर हो सकता है, लेकिन सवाल उठता है कि मूसा जैसे बाकी पत्रकारों का क्या होगा?

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