VANDE MATARAM DEBATE : Debate on 150 years of ‘Vande Mataram’ in Rajya Sabha, heated exchange between Amit Shah and Kharge
नई दिल्ली। ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने पर सोमवार को लोकसभा के बाद मंगलवार को राज्यसभा में भी जमकर बहस हुई। लोकसभा में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चर्चा की शुरुआत की थी, वहीं राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार की ओर से अपना पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने और ‘वंदे मातरम’ को बांटने का गंभीर आरोप लगाया।
अमित शाह ने कहा कि अगर कांग्रेस ने तुष्टिकरण की नीति के तहत ‘वंदे मातरम’ के टुकड़े न किए होते, तो देश के विभाजन की नौबत नहीं आती। शाह ने आपातकाल का जिक्र करते हुए दावा किया कि जब वंदे मातरम 100 साल का हुआ था, तब इंदिरा गांधी ने वंदे मातरम बोलने वालों को जेल में डाल दिया था और अखबार बंद करा दिए थे। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान गांधी परिवार के सदस्य मौजूद नहीं थे।
लोकसभा में प्रियंका गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों कि सरकार बेरोज़गारी और महंगाई जैसे असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा कर रही है पर भी शाह ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा से नहीं डरती, लेकिन सदन चलने नहीं दिया जाता। शाह ने यह भी कहा कि कुछ लोग वंदे मातरम की चर्चा को बंगाल चुनाव से जोड़कर इसके महत्व को कम करना चाहते हैं, जबकि इसके रचनाकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय बंगाल के थे, पर गीत पूरे देश का है।
राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जनता के मुद्दों पर चर्चा से बच रहे हैं और केवल चुनावी राजनीति में रुचि रखते हैं। खड़गे ने कहा कि आरएसएस और हिंदू महासभा ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग नहीं लिया था और आरएसएस ने एक समय संविधान की प्रतियां भी जलाई थीं। खड़गे ने कहा कि असली श्रद्धांजलि भारत माता को तब ही होगी जब सदन में जनता की समस्याओं पर चर्चा हो।
आप सांसद संजय सिंह ने भी सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आरएसएस के चार ऐसे नेताओं के नाम बताए जाएं, जिन्होंने ‘वंदे मातरम’ का नारा लगाकर जेल काटी हो।
दो दिनों से जारी इस बहस के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों एक-दूसरे पर राजनीतिक हमला करते रहे, जबकि मुद्दे की मूल भावना वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ राजनीतिक तकरार के बीच कहीं खोती दिखी।

