जन-जन को जोडऩे वाली भाषा है हिन्दी-डॉ. चितरंजन कर

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मैट्स विश्वविद्यालय में हिन्दी सप्ताह का शुभारंभ, 14 तक होंगे विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रम
रायपुर। हिन्दी जन-जन को जोडऩे वाली भाषा है, जिसमें भारत की अन्य भाषाओं और बोलियो का महत्वपूर्ण योगदान है। हिंदी का भविष्य उज्जवल है, क्योंकि साहित्य, पत्रकारिता, मीडिया, और अनुवाद के जरिये हिंदी दिन प्रतिदिन विकसित होती जा रही है। यह बातें मैट्स यूनिवर्सिटी के हिन्दी विभाग द्वारा हिन्दी सप्ताह के शुभारंभ के अवसर पर राज्य के प्रसिद्ध भाषा विद् डॉ. चितरंजन कर ने कहीं।
मैट्स यूनिवर्सिटी के हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रेशमा अंसारी ने बताया कि प्रतिवर्ष 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग द्वारा हिन्दी सप्ताह का आयोजन किया जाता है। इसी के तहत हिन्दी सप्ताह का उद्घाटन मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं भाषाविद डॉ. चितरंजन कर तथा विशेष अतिथि राज्य के अतंर्राष्ट्रीय कवि श्री मीर अली मीर ने किया।
मुख्य अतिथि डॉ. कर ने अपने संबोधन में हिंदी के वर्तमान बहुआयामी स्वरुप पर वक्तव्य दिया और कहा कि विश्व में हिंदी का स्थान बोलने वालों की संख्या के आधार पर दूसरा है। हिंदी जन जन को जोडऩे वाली भाषा है, जिसमें भारत की अन्य भाषाओं और बोलियो का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि वैमनस्य को जो तोड़ सके वह हिंदी है। आर्य द्रविड़ का समन्वय ही हिंदी है। उत्तर,दक्षिण, पूरब और पश्चिम का शुभ संचय ही हिंदी है। हिंदी संस्कृति है, भाषा है, राजभाषा है, मातृभाषा है और भाषा तोड़ती नहीं जोड़ती है, बल्कि राजनीति तोड़ती है। उन्होंने कहा कि भाषा एक ऐसा झरोखा है जिससे हम दुनिया को देखते हैं।
विशेष अतिथि अंतर्राष्ट्रीय कवि श्री मीर अली मीर ने कहा कि मातृभाषा के साथ राजभाषा के प्रति समाज में एक अच्छा संदेश पहुंचाना हमारा कर्तव्य होना चाहिये। श्री मीर अली मीर ने हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा मे कविता के माध्यम से विद्यार्थियो को भाषा के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने अपनी रचनाओं से समा बांध दिया। उन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित चलचित्र बुलंद अमेज में अपने रचे हुए गीत Óनंदा जाही गा रेÓ गाकर कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कुलपति प्रो. के.पी. यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतेंदु हरिश्चंद्र की कविता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि हमें निज भाषा का ज्ञान नहीं है तो हम अधूरे हैं। उपकुलपति डॉ. दीपिका ढांड ने हिंदी के महत्व से अवगत कराया और साथ ही कहा कि सभी भाषाओं का अपना विशेष महत्व होता है।
इसके पूर्व इस कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यापर्ण और दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। अपने स्वागत भाषण में विभागाध्यक्ष डॉ.रेशमा अंसारी ने विभाग की रचनात्मक गतिविधियों से अवगत कराया तथा कहा कि हर भारतीय को हिन्दी भाषा आनी चाहिए। हिन्दी भाषा के विकास एवं प्रचार-प्रसार में हमारा निरंतर प्रयास जारी रहेगा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि को पुस्तक, शॉल श्रीफल व स्मृति चिन्ह के द्वारा सम्मानित किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ रेशमा अंसारी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में डॉ. सुनीता तिवारी, डॉ. रमणी चंद्राकर, डॉ. सुपर्णा श्रीवास्तव प्रियंका गोस्वामी सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकगण व विद्यार्थीगण उपस्थित रहे। मैट्स यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति श्री गजराज पगारिया, महानिदेशक श्री प्रियेश पगारिया, कुलसचिव श्री गोकुलानंद पंडा ने इस कार्यक्रम के आयोजन व रचनात्मक गतिविधियों के प्रति हर्ष व्यक्त कर इस प्रयास को सराहनीय बताया।

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