The climax of ‘Main Aniket Hoon’ shocked Bilaspur.
रायपुर। न्यायधानी बिलासपुर के सिम्स सभागार में मंचित हुए हिंदी नाटक ‘मैं अनिकेत हूं’ ने दर्शकों को भावनात्मक, रोमांचक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ने का अनुभव दिया। रविवार को मंचन के दौरान एक ओर जहां आईपीएल का फाइनल मैच चल रहा था। उसी समय बिलासपुर के सिम्स ऑडिटोरियम में नाट्य प्रेमी दर्शकों की जबर्दस्त भीड़ यह साबित कर रही थी कि बिलासपुर में नाटकों की दीवानगी सिर चढ़कर बोलती है और यहां रंगमंच का भविष्य अन्य शहरों की तुलना में बेहतर है।

लंबे अरसे बाद सस्पेंस, थ्रिलर, रोचक हिंदी नाटक ‘मैं अनिकेत हूं’ को देखने के लिए जुटे सैकड़ों दर्शक अनिकेत की केंद्रीय भूमिका निभाने वाले निर्देशक शशि वरवंडकर के प्रभावशाली अभिनय से बंधे रह जाते हैं। भारद्वाज वकील की भूमिका में चेतन दंडवते की चातुर्य भरी अभिनयशैली नाटक में कसावट लाती है। अनिकेत की पत्नी मीनाक्षी शर्मा के किरदार में डा. अनुराधा दुबे कहानी को गति प्रदान करतीं हैं।
घरेलू नौकर धर्मा के रोल में रविंद्र ठेंगड़ी, सावित्री शशिकांत जाधव के रूप में भारती पलसोदकर, मुनीम जी प्रकाश खांडेकर, अनिकेत के साले के बने समीर टल्लू, जज दिलीप लांबे, डॉ. कुमारी सुधा गुप्ता की भूमिका में डॉ. प्रीता लाल ‘ के अलावा डाॅ. अभया जोगलेकर, डॉ. शुचिता देशमुख, विनोद राखुंडे, पंकज सराफ, श्याम सुंदर खंगन नाटक में दिलचस्प मोड़ लाते हैं। अंतिम गवाह डा. गजानन ब्रह्मानंद शिरोड़कर यानी आचार्य रंजन मोड़क अपनी गवाही से नाटक को बेहद संवदनशील बना देते हैं। अनिकेत के रूप में शशि वरवंडकर का छह मिनट का अंतिम एकल संजीदा अभिनय दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देता है। साथ ही यह सोचने पर मजबूर भी करता है कि कटघरे में खड़ा व्यक्ति अनिकेत है या शशिकांत जाधव। यह नाटक जितना प्रभावशाली है, उसका तकनीकी पक्ष यानी संगीत, प्रकाश व ध्वनि संयोजन भी उतना ही असरदार है। यह जिम्मेदारी अनिकेत टीम के अजय पोतदार, प्रवीण क्षीरसागर और प्रकाश गुरव बखूबी निभाते हैं।
नाटक शुरू होने से पहले मुख्य अतिथि कलेक्टर संजय अग्रवाल, विशेष अतिथि एसएसपी रजनेश सिंह और सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति, रोटरी क्लब के डॉ. देवेंदर, संस्कार भारती के गजानन फडके ने दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसका आयोजन जीआई हेल्थ फाउंडेशन बिलासपुर ने किया। जबकि संस्कार भारती, श्री हैरिटेज और ऑल रोटरी क्लब्स ऑफ बिलासपुर सह आयोजक रहे। तमाम अतिथियों ने संक्षिप्त संबोधनों में ‘मैं अनिकेत हूं’ को रंगमंच की यादगार अनुभव बताया और नाटक के निर्देशक शशि वरवंडकर से आग्रह किया है कि वे जल्दी ही अपना कोई नया नाटक लेकर यहां आएं।

