THAILAND COMBODIA : War is not stopping on Thailand-Cambodia border, attacks with rockets, cannons and F-16 continue, panic in UNSC
नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्व एशिया में एक बार फिर युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद ने अब हिंसक रूप ले लिया है। शुक्रवार को दोनों देशों के बीच जमकर गोलीबारी, रॉकेट और हवाई हमले हुए। थाईलैंड के एफ-16 जेट्स ने कंबोडिया के छह सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, तो वहीं कंबोडियाई सेना ने BM-21 ग्रैड रॉकेट से हमला किया।
इस हिंसा में अब तक 12 थाई नागरिकों की मौत हो चुकी है। तनाव के चलते UN सुरक्षा परिषद आज रात 12:30 बजे आपात बैठक करेगी। यह बैठक कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट के अनुरोध पर बुलाई गई है।
सीमा पर बारूद, तोप और टैंक तैनात
तनाव इतना बढ़ गया है कि दोनों देशों ने सीमा पर टैंक और भारी हथियार तैनात कर दिए हैं। कंबोडिया ने अपने नागरिकों को थाईलैंड छोड़ने का आदेश जारी कर दिया है। थाईलैंड ने भी अपने नागरिकों को सरहदी इलाके खाली कराने के निर्देश दिए हैं। अब तक 40 हजार से अधिक लोगों का पलायन हो चुका है।
मंदिर बना युद्ध की जड़
झगड़े की जड़ है प्राचीन शिव मंदिर प्रीह विहार, जिसे लेकर दोनों देश अपना-अपना दावा करते हैं। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने इसे कंबोडिया का हिस्सा माना, लेकिन मंदिर के आस-पास की 4.6 वर्ग किमी जमीन पर विवाद कायम है। कंबोडिया ने इस मंदिर को 2008 में UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित करवाया था, जिसे लेकर थाईलैंड ने कड़ा विरोध किया था।
राजनीतिक तूफान और पीएम का इस्तीफा
इस युद्ध के चलते थाईलैंड की प्रधानमंत्री पाइतोंग्तार्न शिनावात्रा को 15 जून को इस्तीफा देना पड़ा। वजह थी कंबोडियाई पीएम से उनकी एक विवादास्पद बातचीत, जिसमें उन्होंने थाई सेना की आलोचना की थी। यह बातचीत लीक होने के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया।
नए तनाव की वजह बनी बारूदी सुरंगें
हाल के दिनों में थाई सैनिकों की बारूदी सुरंगों की चपेट में आने से तनाव और बढ़ गया। थाई सेना का आरोप है कि कंबोडियाई सेना ने हाल ही में ये सुरंगें बिछाईं, जबकि कंबोडिया ने इसे खारिज करते हुए कहा कि ये पुराने माइनफील्ड हैं।
चीन की एंट्री की संभावना
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर जंग नहीं थमी, तो इसमें चीन की भूमिका अहम हो सकती है। चीन दोनों देशों का साझेदार है, लेकिन थाईलैंड से उसकी रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी कहीं ज्यादा गहरी है।
यह विवाद अब केवल सीमा या मंदिर तक सीमित नहीं रह गया है, यह राष्ट्रीय पहचान, राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की लड़ाई बन चुका है। दोनों देशों के बीच यह टकराव कब तक चलेगा और क्या यह एशिया में नए युद्ध का कारण बनेगा – इसका जवाब समय ही देगा।

