BANGLADESH ARMY RESHUFFLE : Major military reshuffle by Tariq government
नई दिल्ली। Tarique Rahman के प्रधानमंत्री बनने के कुछ ही दिन बाद बांग्लादेश सेना में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया है। रविवार को जारी आदेशों में ऑपरेशनल और खुफिया पदों पर नई नियुक्तियां की गईं। इसे नई बीएनपी सरकार का सेना पर पकड़ मजबूत करने का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत में तैनात अधिकारी को बुलाया गया वापस
भारत में रक्षा सलाहकार रहे ब्रिगेडियर जनरल एमडी हाफिजुर रहमान को मेजर जनरल पद पर पदोन्नत कर वापस बुला लिया गया है। उन्हें 55वीं इन्फैंट्री डिविजन का जनरल ऑफिसर कमांडिंग बनाया गया है।
लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद मैनूर रहमान को सेना का चीफ ऑफ जनरल स्टाफ नियुक्त किया गया है। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल मिजानुर रहमान शमीम की जगह ली है, जिन्हें अवकाश पर भेज दिया गया है।
खुफिया और फील्ड कमांड में बदलाव
मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेस इंटेलिजेंस का प्रमुख बनाया गया है। उन्होंने मेजर जनरल मोहम्मद जहांगीर आलम की जगह ली है, जिन्हें विदेश मंत्रालय में राजदूत नियुक्त किया गया है।
लेफ्टिनेंट जनरल मीर मुशफिकुर रहमान को सशस्त्र बल डिविजन का प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर बनाया गया है। वहीं लेफ्टिनेंट जनरल एसएम कामरुल हसन को राजदूत पद पर भेजा गया है।
इसके अलावा मेजर जनरल जेएम एमदादुल इस्लाम को ईस्ट बंगाल रेजिमेंटल सेंटर का कमांडेंट और मेजर जनरल फिरदोस हसन सलीम को 24वीं इन्फैंट्री डिविजन का जनरल ऑफिसर कमांडिंग बनाया गया है।
क्यों हुआ बड़ा फेरबदल?
12 फरवरी 2026 के चुनाव में Bangladesh Nationalist Party को भारी जीत मिली थी। 17 फरवरी को तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद संभाला। इससे पहले छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना सरकार के पतन और Muhammad Yunus की अंतरिम सरकार के दौरान सेना के कई अहम पदों पर नियुक्तियां हुई थीं।
अब नई सरकार ने उन अधिकारियों को हटाकर अपने भरोसेमंद चेहरों को अहम कमांड और खुफिया पदों पर तैनात किया है। इसे सत्ता को स्थिर और मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या होगा असर?
नई सरकार को सेना का सीधा समर्थन मिलने की संभावना।
पुरानी सरकारों से जुड़े अधिकारियों का प्रभाव कम होगा।
भारत-बांग्लादेश सैन्य रिश्तों में नया संतुलन दिख सकता है।
सेना का फोकस राष्ट्रीय सुरक्षा पर केंद्रित करने की कोशिश।
चुनाव पर उठे सवाल
सेना में फेरबदल के बीच विपक्षी दलों ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। जमात ए इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन और नेशनल सिटिजन पार्टी ने कई सीटों पर बड़े पैमाने पर हेरफेर का दावा किया है।
हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में बांग्लादेश की सियासत और भी गरमा सकती है।

