कच्चे माल की महंगाई के विरोध में हड़ताल… एक दिन में 1,500 करोड़ के बिजनेस का नुकसान…

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तमिलनाडु के कोयंबटूर और इरोड जिले में एक दिन के लिए बाजार बंद रखे गए. हड़ताल में काम ठप करते हुए इस जिले के व्यापारियों ने अपने दुकानों के शटर गिराए रखे. इस हड़ताल में एमएसएमई से जुड़े व्यापारियों ने हिस्सा लिया. व्यापारियों का आरोप है कि स्थानीय अधिकारियों का ध्यान दिनों दिन तेजी से महंगे होते कच्चे माल पर नहीं है. गलत नीतियों के चलते कच्चे माल महंगे हो रहे हैं और बिजनेस चलाना मुश्किल हो रहा है.

एक दिन की हड़ताल से अर्थव्यवस्था को 1,500 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है. कोयंबटूर की में जितने भी उद्योग हैं उनमें कई तरह के महंगे और जरूरी सामान बनते हैं. इन उद्योगों में दो पहिया से लेकर छह पहिया वाहन के स्पेयर पार्ट्स, मोटर और पंप, रक्षा और नौसेना से जुड़े उपकरण, वेट ग्राइंडर्स, फाउंडरिज और प्लास्टिक इंडस्ट्री से जुड़े सामान बनते हैं. इन सभी उद्योगों के बंद रहने से एक दिन में करोड़ों रुपये का घाटा हुआ है.

व्यापारियों की मांग
हड़ताल में शामिल व्यापारियों ने ‘PTI’ से कहा कि पिछले एक साल में कच्चे माल के दाम 40 फीसदी से बढ़कर 70 फीसदी हो गए हैं. कुछ-कुछ माल के दाम तो 100 परसेंट तक बढ़े हैं. इससे कई छोटे उद्योग बंद हो रहे हैं और लोगों की नौकरियां जा रही हैं. इस हड़ताल के समर्थन में 40 औद्योगिक संगठन आगे आए अपनी मांगें तेज कीं. कोयंबटूर और इरोड के इस हड़ताल को एमएसएमई से जुड़े ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ एसोसिशन ने बुलाया था.

कौन से इलाके रहे बंद
सोमवार को दिन भर की हड़ताल के कारण पीलामेडु, सिडको, किनाथुकावु, थुडियालुर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में सन्नाटा पसरा रहा. हड़ताल के आयोजकों ने कहा कि कीमतों को नियंत्रण में लाने के लिए कदम उठाने के अलावा केंद्र सरकार को विभिन्न कच्चे माल की दर तय करने के लिए एक समिति बनानी चाहिए.
केंद्र सरकार से अनुरोध

इसके अलावा, फेडरेशन ऑफ तमिलनाडु मर्चेंट एसोसिएशन ने इरोड के जिला कलेक्टर एच कृष्णनुन्नी को एक ज्ञापन सौंपकर उनसे अपनी ओर से तमिलनाडु सरकार का प्रतिनिधित्व करने की मांग की. जिला कलेक्टर से कपड़ा-प्रिंटिंग-छपाई, चमड़ा, प्लास्टिक, खाद्य उत्पादों के कच्चे माल की कीमतों को कम करने के लिए कदम उठाने का अनुरोध किया गया.

ज्ञापन में एसोसिएशन ने कहा कि कुछ ही समय में कपड़ा और अन्य उद्योगों के कच्चे माल की कीमतों में तेजी आई है. इस वजह से वे अपना कारोबार नहीं कर पा रहे. इसके अलावा, केंद्र सरकार ने कपड़ा उत्पादों के लिए जीएसटी (वस्तु और सेवा कर) का प्रतिशत 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने का निर्णय लिया. एसोसिएशन ने कहा कि इससे कपड़ा उद्योग भी प्रभावित होगा.

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