PRAYAGRAJ POCSO CASE : Police reached Varanasi Ashram, Shankaracharya said – I will not run away
रायपुर/प्रयागराज/वाराणसी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बच्चों से कथित यौन शोषण के आरोपों की जांच तेज कर दी है। प्रयागराज से पुलिस टीम दोपहर वाराणसी पहुंची। सूत्रों के मुताबिक उनसे पूछताछ की जा सकती है और आवश्यकता पड़ने पर गिरफ्तारी की कार्रवाई भी संभव है।
सोमवार सुबह शंकराचार्य ने अपने वाराणसी स्थित आश्रम में वकीलों के साथ बैठक की। बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “मैं कहीं भाग नहीं रहा। पुलिस का सामना करूंगा। जिन छात्रों के शोषण की बात कही जा रही है, वे हमारे गुरुकुल के नहीं हैं। जनता को यूपी पुलिस पर भरोसा नहीं है, इसलिए अन्य राज्य की पुलिस से जांच हो।”
महिला भक्त भावुक, बोले – षड्यंत्र पर रोने की जरूरत नहीं
आशीर्वाद लेने पहुंची एक महिला भक्त भावुक होकर रो पड़ी। इस पर शंकराचार्य ने कहा, “रोना तब आता है जब गुरु गड़बड़ निकल जाए। किसी के षड्यंत्र पर रोने की जरूरत नहीं है।” उन्होंने समर्थकों से धैर्य रखने की अपील की।
FIR और कोर्ट की कार्रवाई
24 जनवरी को आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर से शिकायत की थी। आरोप है कि माघ मेला 2026 और महाकुंभ 2025 के दौरान बच्चों के साथ शोषण हुआ।
8 फरवरी को विशेष पॉक्सो कोर्ट में मामला दायर किया गया। 21 फरवरी को बच्चों के बयान दर्ज हुए और उसी दिन झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई। इसमें अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2–3 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
शंकराचार्य का दावा है कि आरोपित छात्र उनके गुरुकुल के नहीं हैं और कथित घटना उनके नियंत्रण से बाहर हुई। उन्होंने कहा, “पुलिस का स्वागत है। हम पूरा सहयोग करेंगे। गिरफ्तारी का सवाल नहीं है।”
सियासी और संत समाज की प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने FIR को लेकर यूपी सरकार पर निशाना साधा। वहीं सपा जिलाध्यक्ष सुजीत यादव ने आश्रम पहुंचकर कहा कि गिरफ्तारी हुई तो विरोध होगा। यूथ कांग्रेस ने भी प्रदेशभर में आंदोलन की चेतावनी दी है।
संत समाज के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। महामंडलेश्वर स्वामी प्रकाशानंद ने कहा कि “संत सत्य के साथ रहता है, जांच किसी अन्य राज्य की एजेंसी से हो।”
प्रयागराज पुलिस ने माघ मेला क्षेत्र का निरीक्षण कर घटनास्थल का नक्शा तैयार किया है। जांच के दौरान बच्चों की सुरक्षा और गरिमा बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिए जाने की बात कही गई है।

