PUNE RAPE MURDER CASE : Hanging in 60 days!
पुणे। महाराष्ट्र के पुणे जिले में 3 साल की बच्ची से रेप और हत्या के दोषी 65 वर्षीय भीमराव कांबले को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। हैरानी की बात यह है कि अदालत का यह फैसला वारदात के महज 60 दिन के भीतर आ गया। कोर्ट ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानते हुए कहा कि आरोपी का अपराध बेहद क्रूर, अमानवीय और बर्बर था।
सोमवार सुबह 11 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच भीमराव कांबले को अदालत में पेश किया गया। कांबले पेशे से मजदूर है। वह 7 बच्चों का पिता और 11 बच्चों का दादा है। उस पर पहले भी एक महिला और 17 वर्षीय किशोरी के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लग चुके हैं।
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यह वारदात 1 मई को पुणे जिले के नसरापुर गांव में हुई थी। गर्मियों की छुट्टियों में बच्ची अपनी नानी के घर आई हुई थी। दोपहर के समय भीमराव कांबले उसे खाने-पीने की चीजें और गाय का नवजात बछड़ा दिखाने का लालच देकर अपने साथ ले गया। इसके बाद वह उसे मवेशियों के तबेले के पास बने एक शेड में ले गया, जहां उसके साथ रेप किया और फिर पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी।
सीसीटीवी फुटेज में आरोपी बच्ची को तबेले की ओर ले जाता हुआ दिखाई दिया था, जिसे अदालत ने अहम सबूत माना।
कोर्ट रूम में फैसला सुनाते हुए जज एसआर सालुंखे ने कहा कि यह अपराध अत्यंत जघन्य, अमानवीय और समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला है। पीड़िता एक मासूम और असहाय बच्ची थी, जिसके साथ बिना किसी उकसावे के क्रूरतापूर्वक हत्या की गई।
बच्ची के पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि भीमराव कांबले सुधरने योग्य नहीं है। उस पर पहले भी 62 वर्षीय महिला, 17 वर्षीय किशोरी और एक पशु के साथ अपराध करने के आरोप लग चुके हैं।
वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपी की उम्र का हवाला देकर नरमी की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि इस उम्र में भी आरोपी की वासना का स्तर उसकी खतरनाक मानसिकता को दर्शाता है।
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अदालत ने 29 जून को फैसला सुरक्षित रखा था। 25 जून को दोषी करार दिए जाने के बाद भीमराव कांबले ने खुद को निर्दोष बताया था, लेकिन कोर्ट ने कहा कि आरोपी में न पश्चाताप दिखाई दिया और न ही सुधार की कोई संभावना।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्ची के शरीर पर 18 चोटों के निशान मिले थे। लोक अभियोजक अजय मिसर ने सुनवाई के दौरान 55 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इनमें फोरेंसिक विशेषज्ञ, जांच अधिकारी, परिजन और बाल गवाह शामिल थे। अदालत ने डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, पोटेंसी टेस्ट और मेंटल फिटनेस असेसमेंट को भी पर्याप्त साक्ष्य माना।
भीमराव कांबले को पॉक्सो एक्ट के तहत फांसी की सजा सुनाई गई है। 2019 में कानून में संशोधन के बाद 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप और हत्या के मामलों में मृत्युदंड का प्रावधान जोड़ा गया था।
अदालत ने माना कि यह मामला पूरी तरह से ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में आता है, क्योंकि पीड़िता केवल 3 साल की थी, उसके शरीर पर 18 चोटों के निशान मिले, रेप के बाद पत्थर से सिर कुचलकर हत्या की गई और आरोपी के खिलाफ पहले से भी गंभीर आरोप मौजूद थे।
