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तिरछी नजर : ट्रांसफर में खेला

 

तहसीलदारों के प्रमोशन के बाद ट्रांसफर में भी गजब का खेला हुआ है। बस्तर के जिले खाली रह गए, तो बिलासपुर में स्वीकृत पद से अधिक तहसीलदारों की पोस्टिंग हो गई। बताते हैं कि बिलासपुर कलेक्टर ने तो बकायदा शासन को चिट्ठी लिखकर मार्गदर्शन मांगा है। बिलासपुर में 10 पद हैं और 15 तहसीलदारों की पोस्टिंग हो गई। अब 5 तहसीलदारों का वेतन कहां से निकलेगा, यह समस्या पैदा हो गई है।
मंत्री बंगले में सीधी दखल रखने वाले इन तहसीलदारों को हटाना भी आसान नहीं है। अब यह कोशिश हो रही है, कि बस्तर के स्वीकृत पदों में पोस्टिंग दिखाकर यहां अटैचमेंट हो जाए। इससे परे पड़ोस के जिले गौरेला-पेंड्रा-मारवाही में पद खाली पड़े हैं। वहां के कलेक्टर ने तहसीलदारों की पोस्टिंग के लिए भी पत्र लिखा है। कहा जा रहा है कि आदिवासी इलाकों में पद खाली रहने से सीएम खफा हैं। प्रमोशन-ट्रांसफर में लेन-देन की पूरी भनक उन्हें है। चर्चा यह है कि सीएम जल्द ही कोई कड़ा फैसला कर सकते हैं।
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गीत लिखकर फंसे

लॉकडाउन के बीच सूरजपुर कलेक्टर रणबीर शर्मा ने राह चलते युवक को थप्पड़ लगाई, तो इसकी गुंज पूरे देश में सुनाई दी। रणबीर पर छत्तीसगढ़ी गाना ‘काबर मारे रे कलेक्टर… बना और लोगों की जुबान में छा गया। रणबीर को तो हटना था सो हटा दिया गया। आईएएस अफसर है, इसलिए ज्यादादिन खाली नहीं रह सकते थे। वो दुग्ध महासंघ का एमडी बन गए। अब समस्या उन्हें आ रही है, जिन्होंने रणबीर शर्मा के खिलाफ मुहिम चलाई थी। यानी काबर मारे रे कलेक्टर….गीत के रचयिता-गायक भी दुग्ध महासंघ का कर्मचारी है। यह कर्मचारी पहले दूसरे विभाग में पदस्थ था। प्रतिनियुक्ति खत्म होने के बाद वह अपने मूल दुग्ध महासंघ में आ गया। काफी दिन तक तो छुट्टी में थे कि शायद एमडी महोदय की पोस्टिंग दूसरी जगह हो जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आखिर थक हारकर कार्यभार संभालना पड़ा। अपने गीत को लेकर परेशान हैं कि उन्हें सफाई देनी न पड़े।
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भूपेश का कद बढ़ा

हिमाचल प्रदेश के उपचुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत से सीएम भूपेश बघेल का कद बढ़ा है। सीएम ने हिमाचल प्रदेश के उपचुनाव में जमकर मेहनत की थी। रोड शो और चुनावी सभा को संबोधित किया था। यहां मंडी लोकसभा के साथ तीनों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली। जबकि हिमाचल में भाजपा की सरकार है। सीएम ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी और महंगाई को लेकर केंद्र सरकार को जमकर कोसा था। इसका फायदा भी मिला। हिमाचल के सीएम जयराम ठाकुर ने माना कि महंगाई की वजह से हारे हैं। ऐसे में हाईकमान की नजर में बघेल का कद बढऩा स्वाभाविक है।
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दीवाली में बुझा एक चिराग

खैरागढ़ राजपरिवार के मुखिया देवव्रत सिंह के आकस्मिक निधन से विशेष कर राजनांदगांव जिले से शोक का माहौल है l चौथी बार के विधायक और एक बार सांसद रहे देवव्रत के विरोधी दल के नेताओं से भी मधुर संबंध रहे हैं l राहुल गांधी से उनकी नजदीकियां जगजाहिर रही है लेकिन स्थानीय राजनीति के चलते पार्टी से अलग हो गए और अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस का हिस्सा बन गए l
जोगी के निधन के बाद वे फिर कांग्रेस में शामिल होने के लिए प्रयासरत थे l कांग्रेस हाईकमान से भी इसके लिए रजामंदी मिल गई थी l वो जनता कांग्रेस के एक और विधायक प्रमोद शर्मा के साथ मिलकर नई पार्टी के गठन और फिर इसका कांग्रेस में विलय की प्रक्रिया में लगे थे l उनकी नई पार्टी अस्तित्व में आ पाती, इससे पहले यह उर्जावान नेता काल के आगोश में समा गया l बताते हैं कि देवव्रत राजनीति जीवन भले ही उंचा था लेकिन पारिवारिक जीवन सुखद नहीं रहा l पहली पत्नी से तलाक हो चुका था और दूसरी पत्नी से अनबन की चर्चा रही l ऐसे में दीवाली की रौशनी में देवव्रत के रूप में एक चिराग बुझ गया जिसकी कमी महसूस की जाती रहेगी l

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