तिरछी नजर : सीआर पर मंत्री-अफसर में तनातनी

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सीआर में मनमाखिक टीप नहीं लिखे जाने के रोचक किस्से नौकरशाहों में आये दिन बनी रहती है और इसे हथियार की तरह प्रयोग भी किया जाता है। ताजा मामला पंचायत एवं स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के विभाग में काम करते हुए अपेक्षाकृत रिजल्ट नहीं देने के कारण दो आईएएस अफसर श्री भुनेश्वर यादव व शिखा राजपूत तिवारी के सीआर में ग श्रेणी देने से विवाद खड़ा हो गया। दोनों नाराज आईएएस को सीएम ने सम्मान देते हुए महत्वपूर्ण विभाग दे दिया है। आगामी दिनों और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के संकेत हैं। विवाद दो और अफसरों के ग श्रेणी मिलने के बाद गहरा गया है। इन अफसरों का कहना है कि मंत्री को ग श्रेणी देने का अधिकार ही नहीं है।

 

नेतागिरी में विरोधी, कारोबार में पार्टनर

राज्य में कांग्रेस और भाजपा के बड़े नेता भले ही आपस में उलझते दिखते हैं। मगर दोनों दलों के नेता और उनके समर्थक मिलकर कारोबार करने में पीछे नहीं रहते हैं। इसका एक नमूना चर्चित आरके मॉल के सौदे में देखने को मिला। बताते हैं कि कुछ माह पहले आमानाका के पास आरके मॉल की बिक्री हुई। भाजपा के शीर्षस्थ नेता के पारिवारिक समझे जाने वाले कारोबारी ने कांग्रेस के लोगों के साथ मिलकर करीब 23 करोड़ में मॉल को खरीद लिया। चर्चा है कि खरीदी के दौरान मसल्स पॉवर का भी उपयोग हुआ। कांग्रेस के एक ताकतवर नेता का साथ मिला, तो सब कुछ आसानी से हो गया। अब नए खरीददारों ने मॉल को 46 लाख रुपये महीने किराये पर चढ़ा दिया है।

रतेरिया की पार्टी में बीजेपी कांग्रेस के दिग्गज

नटवर रतेरिया का नाम तो आपने सुना ही होगा l अरे वही, दिवंगत दिलीप सिंह जूदेव के दोस्त, जिस पर अमित जोगी के साथ मिलकर जूदेव को रिश्वत कांड में फंसाने के आरोप लगे थे l रायगढ़ के इस कारोबारी के बेटे की शादी प्रदेश के सबसे मंहगे होटल मेफेयर में हुई l शादी में प्रदेश के तकरीबन सभी बड़े उद्योगपति कमल सारडा, बजरंग लाल अग्रवाल सहित नामी गिरामी लोग मौजूद थे l कांग्रेस और भाजपा के कई बड़े नेताओं ने भी उपस्थिति दर्ज कराई l भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधाशुं त्रिवेदी और जूदेव के भतीजे रणविजय सिंह की मौजूदगी भी चर्चा में रही l वैसे तो दिलीप सिंह जूदेव ने नटवर रतेरिया को माफ कर दिया था और संबंध भी सामान्य हो गए थे लेकिन जूदेव के करीबी लोग आज भी नटवर को उलाहना देते हैं l वे मानते हैं कि यदि जूदेव के खिलाफ षडयंत्र नहीं होता, तो वो सीएम होते l

दुविधा में भाजपा

प्रदेश स्तर से लेकर जिला स्तर तक भाजपा नेताओं में दुविधा की स्थिति बनी हुई है। भाजपा के दिग्गज नेताओं व पूर्व मंत्रियों की टिकट कटने का हल्ला जोरदार है। इस हल्ले से भाजपा के कार्यकर्ता व सेकंड लाईन के नेता खुश है। भाजपा संगठन मंत्री के बयानों में तो परिवर्तन का संकेत दिख रहे है। लेकिन संगठन में पद देने के फैसलों में पुराने दिग्गज नेताओं की वापसी हो रही है। पूर्व मंत्री राजेश मूणत , अमर अग्रवाल सहित बड़े नेता एक तरफ टिकट में परिवर्तन की बात स्वीकार रहे हैं। दूसरी तरफ अपने विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के दूसरे किसी नेता का कार्यक्रम भी आयोजित नहीं करने दे रहे है। ऐसे में महत्वाकांक्षी सेकंड लाईनर नेता भी परेशान और हैरान है। पार्टी के दिग्गज नेताओं की पैनी निगाह विरोधी के बंगले और घर में लगी हुई है।

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