PAKISTAN ECONOMIC CRISIS : I feel ashamed asking for a loan, says Pak PM Shahbaz
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पहली बार खुले मंच से विदेशी कर्ज पर देश की बढ़ती निर्भरता को लेकर नाराजगी और बेबसी जाहिर की है। उन्होंने माना कि खराब आर्थिक हालात के चलते उन्हें बार-बार विदेश जाकर कर्ज मांगना पड़ता है और यह पाकिस्तान के आत्मसम्मान पर भारी पड़ रहा है।
राजधानी इस्लामाबाद में कारोबारी नेताओं को संबोधित करते हुए शहबाज ने कहा कि जब वह और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर दुनियाभर में पैसे मांगने जाते हैं तो उन्हें शर्म महसूस होती है। उन्होंने कहा कि कर्ज लेना अब मजबूरी बन चुका है और कई बार कर्ज देने वालों की शर्तों को ‘ना’ कहने की स्थिति भी नहीं रहती।
प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि पाकिस्तान को अब कर्ज के अलावा दूसरे आर्थिक रास्ते तलाशने होंगे। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान IMF से नई मदद और पुराने कर्ज को रोलओवर कराने की कोशिश में जुटा है।
शहबाज ने माना कि देश में गरीबी और बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है। पाकिस्तान की करीब 45 प्रतिशत आबादी गरीबी में जी रही है, जबकि 80 लाख से ज्यादा लोग बेरोजगार हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिसका असर आज अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है।
प्रधानमंत्री ने चीन को पाकिस्तान का “हर मौसम का दोस्त” बताते हुए कहा कि सऊदी अरब, यूएई और कतर ने भी हर मुश्किल वक्त में मदद की है। फिलहाल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इन्हीं देशों की मदद के सहारे चल रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2025 तक पाकिस्तान पर कुल सरकारी कर्ज 76 हजार अरब रुपये से ज्यादा हो चुका है, जो बीते चार सालों में लगभग दोगुना हो गया है। डिफॉल्ट से बचने के लिए पाकिस्तान बार-बार IMF, चीन और खाड़ी देशों पर निर्भर होता जा रहा है।

