अम्बिकापुर। ओपी अग्रवाल को छत्तीसगढ़ के उत्कृष्ट सम्मान से सम्मानित किया ओपी अग्रवाल विगत 4 दशकों से पर्यावरण एवं जैव विविधता के क्षेत्र में निरंतर कार्य करते रहे छत्तीसगढ़ में उनकी पहचान समाजिक व कृषि भवानी की कोई स्थापित करने वाले व्यक्ति के रूप में होती है पर्यावरण के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान को दृष्टिगत रखते हुए वर्ष 1992 में तत समय भारत के प्रधानमंत्री टीवी नरसिम्हा राव में वृक्षामित्र की उपाधि से सम्मानित किया मात्र डेढ़ डेढ़ वर्ष विश्वविद्यालय परिसर भाकुरा अंबिकापुर मैं डेढ़ लाख पौधे का रोपण और उसकी सुरक्षा कर वह भी अग्रवाल ने यह दिखा दिया था कि उम्र का पड़ाव कोई भी हो लेकिन वानिकी के क्षेत्र में उनका काम थमने वाला नहीं है अग्रवाल का आकस्मिक निधन दिनांक 27 दिसंबर 2021 को हो गया जो कि छत्तीसगढ़ के लिए आपूर्णि छती है उन्होंने अपना पूरा जीवन व पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में लगा दिया वृक्षामित्र श्री अग्रवाल ने जीवन के अंतिम दौर में भी समाज के सामने एक ऐसा सफल मॉडल प्रस्तुत किया जिसमें कम जमीन पर भी खेती मछली पालन गोपालन कर किसानों की आय में वृद्धि की जा सकती है उल्लेखनीय होगा कि प्रदेश में की मांग की खेती को बढ़ावा देने में अहम योगदान रहा सर्वर सर्वाधिक प्रोटीन वाले की मांस का उपयोग जनजाति समाज में दाल के रूप में किया जा सकता है फलस्वरूप व्यवसायिक स्तर पर आदिवासियों की आर्थिक उन्नति के लिए की मांस की खेती का आधार बनाया संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा अंबिकापुर के कार्य परिषद एवं ग्रामीण बैंक के निदेशक मंडल के सदस्य के रूप में भी उनका कार्यकाल उत्कृष्ट रहा विक्रम वेध ओपी अग्रवाल को छत्तीसगढ़ के सम्मान से सम्मानित करना प्रदेश में उनके पर्यावरण एवं विविध क्षेत्रों में किए गए योगदान का वास्तविक मूल्यांकन होगा
