नन गिरफ़्तारी मामले में आया नया मोड़, पीड़ित युवतियों ने ज्योति शर्मा समेत बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर लगाए ये गंभीर आरोप 

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नारायणपुर। मानव तस्करी और धर्मांतरण के आरोपों में गिरफ्तार दो ननों और एक युवक को एनआईए कोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब मामले में नया मोड़ आ गया है। घटना में पीड़िता बताई गईं तीन आदिवासी युवतियों ने अब खुद सामने आकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर मारपीट, धमकी और झूठा बयान दिलवाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

 

तीनों पीड़ित युवतियों कमलेश्वरी प्रधान, ललिता उसेंडी और सुकमति मंडावी ने शनिवार को नारायणपुर एसपी कार्यालय में बजरंग दल की जिला संयोजक ज्योति शर्मा और दो अन्य के खिलाफ FIR की मांग करते हुए आवेदन सौंपा। आरोप है कि उन्हें दुर्ग रेलवे स्टेशन पर जबरन रोका गया, कमरे में बंद कर पीटा गया और जातिसूचक गालियां दी गईं।

 

 

ललिता उसेंडी ने कहा- “हमसे कहा गया रेप करवा देंगे”

पीड़िता ललिता उसेंडी ने कहा कि हमें 50 से ज्यादा लोगों की भीड़ में जबरन घसीटा गया। कहा गया कि ‘तुम्हें लड़कों के साथ सुलवाया जाएगा, रेप करवा देंगे। थप्पड़ पर थप्पड़ मारा गया और जब हमने वीडियो बनाने की कोशिश की तो मना किया गया।

 

कमलेश्वरी प्रधान: “हम अपनी मर्जी से जा रहे थे”

पीड़िता कमलेश्वरी प्रधान ने साफ कहा कि हम तीनों अपनी मर्जी से और माता-पिता की सहमति से ननों के साथ आगरा जा रही थीं, जहां एक ईसाई अस्पताल में नौकरी मिलने वाली थी। वेतन, भोजन और आवास की सुविधा दी जानी थी। धर्मांतरण जैसी कोई बात नहीं थी, हम पहले से ईसाई हैं।”

 

उन्होंने बताया कि हमें दुर्ग स्टेशन पर रोका गया, पीटा गया और जबरन बयान दिलवाया गया। बजरंग दल वालों ने कहा कि हम ‘नीच जाति के गोंड’ हैं। बहुत गालियाँ दी गईं। ऐसा लगा जैसे अपराधी हम नहीं, वे लोग थे।

 

सुकमति मंडावी बोली- “कमर पकड़ कर घसीटा, थप्पड़ मारे”

पीड़िता सुकमति ने बताया कि हमें कमरे में बंद कर बेरहमी से पीटा गया। उन्होंने हमें थप्पड़ मारे और धमकाया कि झूठ बोलो। हम कह रहे थे कि छोड़ दो, लेकिन वो हमें और पीटते रहे।

 

परिजन बोले- “सच्चाई की जीत हुई”

ननों के साथ गिरफ्तार युवक सुखमन मंडावी की बहन सुमति मरकाम ने कहा कि मेरे भाई को फंसाया गया। उसे भी मारा गया और कान में इतनी चोट लगी कि सुनाई देना बंद हो गया। बच्चियों को जबरदस्ती बयान बदलने पर मजबूर किया गया। आज कोर्ट का फैसला आया, इससे साबित होता है कि सच्चाई की जीत हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्योति शर्मा ने बच्चियों को कहा कि तुम लोग गोंड गंवार हो, पढ़े-लिखे नहीं हो। ऐसी जातिवादी बातों से उनका अपमान किया गया।

 

अब क्या चाहते हैं पीड़ित पक्ष?

मामले में तीनों युवतियों और परिजनों की मांग है कि ज्योति शर्मा और बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं पर SC/ST एक्ट और अन्य धाराओं में कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि किसी और बेटी के साथ ऐसा दुर्व्यवहार न हो।

 

गौरतलब है कि यह मामला सिर्फ मानव तस्करी या धर्मांतरण का नहीं, बल्कि जातीय भेदभाव, महिला उत्पीड़न और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों में तब्दील हो चुका है। एनआईए कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि राज्य प्रशासन आरोपियों पर कब और क्या कार्रवाई करेगा ?

 

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