9 साल की उम्र में घर छोड़ा, आजादी की लड़ाई लड़ी और ऐसे बने हिन्दुओं के धर्म गुरु

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नरसिंहपुर: द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का रविवार को 99 साल की उम्र में निधन हो गया. स्वामीजी ने मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में अंतिम सांस ली. इनका जन्म मध्य प्रदेश में सिवनी के दिघोरी गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. इनका नाम पोथी राम उपाध्याय रखा गया. हिन्दुओं के सबसे बड़े गुरु माने जाने वाले स्वरूपानंद सरस्वती ने मात्र 9 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था और धर्म की यात्रा का सफर शुरू कर दिया था.

अपनी धर्म यात्रा के दौरान वो काशी पहुंचे और स्वामी करपात्री महाराज से वेद और शास्त्रों की शिक्षा ग्रहण की. अंग्रेजों के दौर में मात्र 19 साल की उम्र में उन्हें क्रांतिकारी साधू कहा गया. वो इसी नाम से पहचाने जाने लगे.

आजादी की लड़ाई लड़ी और 15 महीने जेल में बिताए
अपनी धर्मयात्रा जारी रखने के साथ स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने आजादी की लड़ाई भी लड़ी. अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में शामिल होने के कारण उन्हें वाराणसी में 9 महीने और मध्यप्रदेश की जेल में 6 महीने बिताने पड़े थे. इस दौरान उन्हें करपात्री महाराज के राजनीतिक दल राम राज्य परिषद का अध्यक्ष भी घोषित किया गया.

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