INDIGO CRISIS : Centre takes strict action on Indigo crisis, summons CEO
नई दिल्ली, 10 दिसंबर 2025। एक सप्ताह से अधिक समय तक चले ऑपरेशनल संकट के बीच मंगलवार को इंडिगो एयरलाइन के सीईओ पीटर एल्बर्स को नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) के मुख्यालय में तलब किया गया। बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू और मंत्रालय के सचिव समीर सिन्हा मौजूद रहे। बैठक में इंडिगो के संचालन, यात्रियों की सुविधाओं, रिफंड, क्रू और पायलट रोस्टर, तथा बैगेज प्रबंधन जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
केंद्र सरकार ने बैठक के बाद स्थिति को गंभीर मानते हुए इंडिगो के ऑपरेशंस में 10% की कटौती का आदेश जारी किया है, ताकि कैंसिलेशंस कम हों और संचालन सामान्य हो सके।
इंडिगो ने कहा –
मीटिंग से पहले इंडिगो एयरलाइन ने दावा किया कि उसकी सभी उड़ानें अब सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं और ऑन–टाइम परफॉर्मेंस (OTP) भी वापस सही स्तर पर पहुंच गया है। कंपनी ने बुधवार को 1900 उड़ानें संचालित करने की योजना बताई।
इंडिगो ने कहा कि उसके 138 स्टेशनों पर 1800 से अधिक उड़ानें पहले ही नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। कंपनी का कहना है कि हवाई अड्डों पर फंसे लगभग सभी बैगेज यात्रियों तक पहुंचा दिए गए हैं और शेष जल्द वितरित किए जाएंगे। साथ ही फुल रिफंड प्रक्रिया को वेबसाइट पर आसान और ऑटोमेटेड किया गया है।
सीईओ पीटर एल्बर्स ने वीडियो संदेश में कहा, “एयरलाइन अब पूरी तरह स्थिर हो चुकी है। संकट 5 दिसंबर से शुरू हुआ था, जब हम सिर्फ 700 उड़ानें चला पाए थे। हम यात्रियों से हुई परेशानी के लिए खेद व्यक्त करते हैं।”
लोकसभा में उड्डयन मंत्री ने क्या कहा?
लोकसभा में नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने साफ कहा कि इंडिगो को नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों में कोई विशेष छूट नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, “कोई भी एयरलाइन, चाहे कितनी बड़ी क्यों न हो, यात्रियों को इस तरह परेशान नहीं कर सकती।” मंत्री ने घरेलू बाजार में नई एयरलाइनों को बढ़ावा देने की भी बात कही, क्योंकि वर्तमान में इंडिगो का मार्केट शेयर 65% के आसपास है।
इस बीच DGCA ने अस्थायी रूप से इंडिगो को FDTL नियमों में राहत दी थी, जिस पर सवाल उठे। इंडिगो ने मंत्रालय को कारण बताते हुए कहा कि टेक्निकल समस्याएं, विंटर शेड्यूल में बदलाव, खराब मौसम और नए FDTL नियम संकट की मुख्य वजह बने।
इंडिगो का यह ऑपरेशनल संकट हाल के वर्षों में भारतीय उड्डयन क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना जा रहा है। केंद्र सरकार की सख्ती और 10% ऑपरेशनल कटौती के आदेश से एयरलाइन पर तुरंत सुधार लाने का दबाव बढ़ गया है।

