BREAKING: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Mahadev ऑनलाइन बुक (MOB) के अवैध सट्टेबाजी में बड़ी कार्रवाई की है। बता दें की ED, रायपुर जोनल ऑफिस ने 10.01.2026 को PMLA, 2002 के तहत एक अस्थायी संलग्न आदेश (PAO) जारी किया है, जिसमें रवि उप्पल, रजत कुमार सिंह, सौरभ आहूजा और विशाल रमानी, विनय कुमार और हनी सिंह, लकी गोयल और राजा गुप्ता की लगभग 21.45 करोड़ रुपये की रायपुर व दुबई में स्थित चल और अचल संपत्तियों को संलग्न किया गया है। यह कार्रवाई महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) की अवैध सट्टेबाजी संचालन के मामले में की गई है।
संलग्न संपत्तियों में 98.55 लाख रुपये की चल संपत्तियां और 27 अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनमें आवासीय घर, व्यावसायिक दुकानें, कृषि भूमि और लक्सरी अपार्टमेंट शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 20.46 करोड़ रुपये है। अब तक कुल 2,621 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को जब्त, फ्रीज या संलग्न किया गया है।
जानिए किन आरोपियों की जब्त हुई संपत्ति
प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने बताया किन लोगों की संपत्तियों को अटैच किया गया है। इसमें रवि उप्पल, रजत कुमार सिंह, सौरभ आहूजा, विशाल रमानी, विनय कुमार, हनी सिंह, लकी गोयल और राजा गुप्ता का नाम शामिल है।
रवि उप्पल: मुख्य प्रमोटर के रूप में पहचाना गया जो अभी भी फरार है। आदेश में दुबई (एट्रिया रा) में लगभग 6.75 करोड़ रुपये की
रजत कुमार सिंह: सौरभ चंद्राकर का करीबी सहयोगी जिसने कई पैनल संचालित किए और 15-20 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई (POC) अर्जित की। अटैच की गई संपत्तियों में भिलाई और दुबई की संपत्तियां शामिल हैं।
सौरभ आहूजा और विशाल रमानी: साझेदार जिन्होंने लगभग 100 पैनल संचालित किए और लगभग 30 करोड़ रुपये की POC अर्जित की। दुर्ग और भिलाई की संपत्तियां अटैच की गई हैं।
विनय कुमार और हनी सिंह: उन्होंने छह पैनल संचालित किए और सट्टेबाजी ऐप के फर्जी प्रचार में शामिल थे। उन्होंने अनुमानित 7 करोड़ रुपये (प्रत्येक 3.5 करोड़ रुपये) की POC अर्जित की। अटैचमेंट में जयपुर और नई दिल्ली में आवासीय संपत्तियों के साथ-साथ महिंद्रा थार और टोयोटा फॉर्च्यूनर सहित वाहनों का एक बेड़ा शामिल है।
लकी गोयल: वह टेलीग्राम-आधारित प्रचार में शामिल था और उसने लगभग 2.55 करोड़ रुपये की POC अर्जित की। उक्त आदेश के तहत, राजस्थान में कई दुकानें और प्लॉट अटैच किए गए।
राजा गुप्ता: दुबई स्थित ऑपरेटर जो कम से कम 10 पैनलों का प्रबंधन करता था। रायपुर में एक अचल संपत्ति जो POC से हासिल की गई थी, उसे अटैचमेंट के लिए विचार किया गया। ED ने छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई FIR के आधार पर जांच शुरू की, जिससे एक बड़े सट्टेबाजी सिंडिकेट का खुलासा हुआ। यह प्लेटफॉर्म टाइगर एक्सचेंज, Gold365 और Laser247 जैसे डोमेन नामों के ज़रिए अवैध सट्टेबाजी सेवाएं देता था। यह ऑपरेशन सहयोगियों द्वारा मैनेज किए जाने वाले “पैनल/ब्रांच” के फ्रेंचाइजी मॉडल के ज़रिए चलता था, जबकि मुख्य प्रमोटर, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दुबई से काम करते थे।

