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रसोई गैस पर तो वैट नहीं फिर क्यों बढ़ रहें दाम,बतायें मोदी जी-भूपेश

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर प्रधानमंत्री को घेरा
रायपुर।
 पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान की छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आलोचना की है। उन्होंने गुरुवार को रायपुर में कहा, प्रधानमंत्री देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्र सरकार की वजह से कीमतें बढ़ी हैं। अगर वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) की वजह से ऐसा है तो रसोई गैस की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? उस पर तो कोई वैट नहीं लगता।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में मीडिया से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी कोरोना की बैठक ले रहे थे। अचानक ही वे पेट्रोल-डीजल की बात करने लगे। मुख्यमंत्री ने कहा, सेंट्रल गवर्नमेंट एक्साइज ड्यूटी लगाती है लेकिन अब इन्होंने सेस लगा दिया। इस सेस का पूरा पैसा सेंट्रल गवर्नमेंट को मिलता है, राज्य सरकारों को नहीं। राज्य सरकारों का हक मारा गया।
मुख्यमंत्री ने कहा, केंद्र सरकार को छत्तीसगढ़ को 30 हजार करोड़ की राशि देनी है। जहां तक वैट की बात है तो छत्तीसगढ़ में 24 प्रश वैट  लगाया जा रहा है। बाकी राज्यों में 29 से 31प्रश तक वैट लगाया जा रहा है। उसमें भाजपा शासित राज्य भी हैं। कहा कि वे पहले भाजपा शासित राज्यों मे वैट कम करें। खुद सेस कम नहीं करते और राज्यों को नसीहत दे रहे हैं।
सीएम ने कहा कि यह पर उपदेश कुशल बहुतेरे वाली स्थिति है। पेट्रोल-डीजल के दाम रोज केंद्र सरकार बढ़ा रही है। रसोई गैस में तो वैट नहीं लगता, फिर उसके दाम क्यों बढ़ाए जा रहे। खाने के तेल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री देश के लोगों को बहकाने और झांसा देने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कोरोना की ऑनलाइन समीक्षा बैठक के दौरान पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतों का मुद्दा छेड़ा। उन्होंने कहा, युद्ध की परिस्थिति पैदा होने से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। ऐसे माहौल में चुनौतियां बढ़ रही हैं। हमने नवंबर में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी। राज्यों से भी ऐसा ही करने का आग्रह किया था। कुछ राज्यों ने वैट घटाया लेकिन कुछ राज्यों ने अपने लोगों को लाभ नहीं दिया। इस वजह से उन राज्यों में दूसरे राज्यों के मुकाबले पेट्रोल-डीजल की कीमतें ज्यादा हैं। एक तरह से इन राज्यों के लोगों के साथ ये अन्याय तो है ही साथ ही इससे पड़ोसी राज्यों को भी नुकसान होता है। जो राज्य टैक्स में कटौती करते हैं उन्हें राजस्व की हानि होती है।

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