आईएएस अफसर पूजा सिंघल केस, ईडी ने कही बड़ी बात

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रांची: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को एक बयान में दावा किया कि झारखंड की निलंबित आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अधिकारी पूजा सिंघल को खूंटी जिले के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) कोष से अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा कमीशन का भुगतान किया गया। ईडी ने साथ ही कहा कि उक्त ”कमीशन” का उपयोग सिंघल और उनके पति ने विभिन्न संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए किया। संघीय जांच एजेंसी ने यह आरोप झारखंड की पूर्व खनन सचिव के खिलाफ पांच जुलाई को रांची में विशेष धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) अदालत के समक्ष उनके और पांच अन्य के खिलाफ दायर आरोपपत्र में लगाये हैं। अदालत ने अभियोजन पक्ष की शिकायत पर मंगलवार को संज्ञान लिया। आरोपपत्र में 2000 बैच की आईएएस अधिकारी सिंघल, उनके व्यवसायी पति अभिषेक झा, कार्यकारी अभियंताओं जयकिशोर चौधरी, शशि प्रकाश, सहायक अभियंता आर के जैन जैसे सरकारी अधिकारियों और सिंघल दंपति के चार्टर्ड एकाउंटेंट सुमन कुमार के नाम हैं। नौकरशाह और सीए सुमन कुमार को इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था, जो महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के कोष में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जब सिंघल खूंटी की उपायुक्त थीं। एजेंसी द्वारा पहले गिरफ्तार किए गए एक अन्य आरोपी, पूर्व कनिष्ठ अभियंता राम बिनोद प्रसाद सिन्हा, उस जिले में तैनात थे। ईडी ने कहा कि जांच में पाया गया, ”राम बिनोद प्रसाद सिन्हा और अन्य इंजीनियरों द्वारा (आईएएस) पूजा सिंघल (जो उस समय खूंटी की उपायुक्त थी) को धनराशि की मंजूरी के संबंध में कमीशन का भुगतान किया गया था।” एजेंसी ने आरोप लगाया, ”आरोपियों- पूजा सिंघल और उनके पति अभिषेक झा- ने भी अनुसूचित अपराध की अवधि के दौरान अपने बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकदी जमा की थी, जिसका बाद में विभिन्न संपत्तियों के अधिग्रहण के उद्देश्य से उपयोग किया गया।” उसने दावा किया कि सीए सुमन कुमार को ”पूजा सिंघल की ओर से अवैध धन के संग्रह” में शामिल पाया गया। ईडी ने बयान में कहा, ”आरोपियों ने पूजा सिंघल, आईएएस द्वारा अर्जित अपराध की बड़ी आय का विभिन्न अचल संपत्तियों में निवेश भी किया है।” ईडी ने कहा, ”आरोपी, इसलिए, अनुसूचित अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप उत्पन्न अपराध की आय से जुड़ी गतिविधि में शामिल पाए गए और इस तरह पीएमएलए, 2002 की धारा 3 के अपराध किए गए।” ईडी ने मई में सिंघल और अन्य के परिसरों पर छापा मारा था और झारखंड खनन सचिव का प्रभार संभाल रही नौकरशाह को ईडी द्वारा उनकी गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया था। एजेंसी ने छापेमारी के बाद 19.76 करोड़ रुपये नकद, जगुआर एफ पेस और टोयोटा फॉर्च्यूनर सहित चार वाहन, कई संबंधित दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए थे। ईडी ने सिंघल को झारखंड में कथित अवैध खनन से भी जोड़ा है।

 

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