SUPREME COURT : Will the DPDP Act impact journalism? SC seeks Centre’s response
नई दिल्ली। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने कानून और इससे जुड़े नियमों को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
DNPA का कहना है कि कानून में पत्रकारिता के लिए स्पष्ट छूट नहीं होने से खोजी पत्रकारिता, स्वतंत्र रिपोर्टिंग और गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। एसोसिएशन ने कानून के कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए उन्हें रद्द करने और सुनवाई के दौरान अंतरिम रोक लगाने की मांग की है।
DNPA को इन 5 बातों पर आपत्ति
1. खोजी पत्रकारिता : निजी जानकारी इस्तेमाल करने से पहले सहमति लेना जरूरी होने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच मुश्किल हो सकती है। संबंधित व्यक्ति को पहले जानकारी मिलने से सबूत नष्ट होने का खतरा भी बताया गया है।
2. खबरें हटाने का दबाव : डेटा मिटाने या सहमति वापस लेने की मांग के जरिए प्रकाशित खबरों को हटवाने का दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
3. गोपनीय सूत्र : सरकारी संस्थाओं की जानकारी मांगने की शक्तियों से पत्रकारों के सूत्रों की पहचान उजागर होने का खतरा बताया गया है।
4. RTI पर असर : DNPA ने सूचना का अधिकार कानून की धारा 8(1)(j) में हुए बदलाव को भी चुनौती दी है।
5. सरकारी शक्तियां : एसोसिएशन ने सरकारी संस्थाओं को मिली छूट और सूचना तक पहुंच सीमित करने की शक्तियों पर सवाल उठाए हैं।
DNPA में 21 न्यूज पब्लिशर्स शामिल हैं। अब केंद्र के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई अहम होगी।
