महिला की मौत के लिए डाक्टर जिम्मेदार नहीं: हाई कोर्ट

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि कोरोना संक्रमण काल के दौरान मरीजों के उपचार में डाक्टरों ने भरपूर मदद की है। इसमें किसी तरह की लापरवाही सामने नहीं आई है। इलाज में लापरवाही के लिए चिकित्सक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने इसी तरह के मामले में दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अंबिकापुर निवासी अधिवक्ता संजय अंबस्ट ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।

इसमें बताया गया है कि रामकृष्ण केयर अस्पताल प्रबंधन द्वारा कोरोना काल में उपचार के दौरान मरीजों से मनमानी शुल्क वसूल किया है। जबकि, शासन ने कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए फीस निर्धारित की है, जिसका भी पालन नहीं किया गया। याचिका में उन्होंने बताया कि उनकी मां सुमन अंबस्ट पीलिया से पीड़ित थीं। इस पर उन्हें उपचार के लिए रामकृष्ण अस्पताल ले गए थे। तब उनके लीवर का उपचार होना था। लेकिन, अस्पताल में भर्ती करने के बाद डाक्टरों ने उन्हें कोविड संक्रमित बता दिया।

जबकि, उनमें कोरोना के कोई लक्षण ही नहीं थे। इस दौरान गलत उपचार के कारण उनकी मां का 2 अक्टूबर 2020 को निधन हो गया। याचिका में बताया गया है कि कोविड नहीं होने के बाद भी उनकी मां का कोरोना का उपचार किया गया। केंद्र सरकार व राज्य शासन के गाइडलाइन के मुताबिक कोरोना संक्रमितों की मौत की सूचना देने के लिए जिला व राज्य स्तर पर सर्विलांस कमेटी बनी है, जिसके तहत कोरोना संक्रमितों की अंत्येष्टि निर्धारित प्रोटोकाल के तहत ही किया जाना है।

लेकिन, उनकी मां के शव को डाक्टरों ने बिना किसी नियम के ही सौंप दिया। फिर स्वजन उन्हें लेकर अंबिकापुर आ गए और सामाजिक रिजी रिवाज के साथ अंत्येष्टि की। याचिका मंे इस लापरवाही के लिए अस्पताल प्रबंधन पर कोरोना प्रोटोकाल के नियमों का उल्लंघन करने का मामला दर्ज करने की मांग की गई। इस याचिका की सुनवाई जस्टिस गौतम भादुड़ी की एकलपीठ में हुई। उन्होंने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही कहा है कि कोरोना के दौरान डाक्टरों ने महामारी के खिलाफ लड़ने में कोई कमी नहीं की है। ऐसे में उपचार में लापरवाही बताकर उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

युगलपीठ में करेंगे अपील

याचिकाकर्ता अधिवक्ता संजय अंबस्ट का कहना है कि उन्होंने अपनी याचिका में इलाज में लापरवाही का जिक्र किया है। लेकिन, उन बिंदुओं पर कोई राहत नहीं मांगी है और न ही आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। बल्कि, उनका कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने कोरोना काल के दौरान कोविड मरीज के शव को स्वजनों को सौंपने में लापरवाही है। इसलिए उनके खिलाफ कोरोना प्रोटोकाल का उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया गया। उन्होंने एकलपीठ के इस फैसले के खिलाफ युगलपीठ में अपील करने की बात कही है।

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