Disclosure in the Assembly: Long list of irregularities in the Education Department
छत्तीसगढ़ के विधानसभा में स्कूल शिक्षा तंत्र पर उठे सवालों ने एक बार फिर प्रशासन की पोल खोल के रख दी हैं। विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, राज्य में 25 जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) पर वर्ष 2022-23 से जनवरी 2026 के बीच अनियमितता, भ्रष्टाचार, घूसखोरी और वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े आरोपों की जांच लंबित है। चौंकाने वाली बात यह है कि चार वर्षों के दौरान अधिकांश मामलों में जांच पूरी नहीं हो सकी और अधिकारी जांच के बीच ही अन्य जिलों में पदस्थापित होते रहे।
विधानसभा में रखे गए विवरण में अलग-अलग जिलों से जुड़ी शिकायतें, खरीद प्रक्रियाओं में कथित उल्लंघन, पदस्थापना और पदोन्नति में नियम विरुद्ध निर्णय, अनुकंपा नियुक्तियों में अनियमितता तथा सूखा राशन व अन्य योजनाओं में वित्तीय गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है। कई मामलों में “कार्यवाही प्रक्रियाधीन” का उल्लेख है, जबकि कुछ में “आंशिक दोष सिद्ध” या “दोष सिद्ध नहीं” जैसे निष्कर्ष दर्ज हैं।
सबसे अधिक चर्चा उन मामलों की रही, जिनमें जांच लंबित रहने के बावजूद अधिकारियों के स्थानांतरण और नई पदस्थापनाओं पर सवाल उठे। उदाहरण के तौर पर, भारती प्रधान पर बस्तर में कार्यकाल के दौरान शिकायतों की जांच जारी रहने के बीच कोंडागांव में डीईओ पद संभालने को लेकर विपक्ष ने आपत्ति जताई। इसी तरह, मधुलिका तिवारी के विरुद्ध बेमेतरा में वित्तीय अनियमितता की जांच के दौरान जशपुर में पदस्थापना और वहां भी नए आरोप सामने आने का मामला बहस का विषय बना।
रिश्वत प्रकरण में रामललित पटेल की गिरफ्तारी ने विभागीय छवि पर गंभीर प्रभाव डाला। एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई में रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद वे फिलहाल जेल में निरुद्ध हैं। वहीं, प्रमोद कुमार भटनागर से जुड़े मामलों का जिक्र भी रिपोर्ट में है, जिन पर जांच और कार्यवाही लंबित बताई गई है।

