CHHATTISGARH : Did rats eat the rice or did politics eat it? Bhupesh Baghel takes a sharp dig.
रायपुर। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में शॉर्टेज का मामला अब सीधे सियासत के अखाड़े में उतर चुका है। कवर्धा के चारभांठा और बघर्रा खरीदी केंद्रों में धान की कमी को लेकर जब अफसरों ने वजह “चूहों” को बताया, तो इसी बहाने राजनीति भी तेज हो गई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मुद्दे पर तीखा तंज कसते हुए नागपुर और गुजरात की ओर इशारा कर दिया।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है, यहां के चूहे भूखे नहीं हो सकते। अगर 30 करोड़ का धान चूहे खा गए हैं, तो वो नागपुर या गुजरात से आए भूखे चूहे ही होंगे। उनका यह बयान सीधे तौर पर भाजपा और केंद्र की राजनीति की ओर इशारा माना जा रहा है। सियासत पर नजर रखने वालों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्माने वाला है।
धान शॉर्टेज को लेकर कांग्रेस ने विरोध का अलग अंदाज अपनाया। कांग्रेस नेताओं ने चूहों को जिम्मेदार बताने पर प्रशासनिक अफसरों को चूहे का पिंजरा भेंट कर अपना विरोध दर्ज कराया। इसके बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि ये “भूखे चूहे” सिर्फ धान ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जमीन भी कुतर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कवर्धा, महासमुंद, जशपुर समेत कई जिलों में बेशकीमती जमीनें निगली जा चुकी हैं और अब इन चूहों की अगली मंजिल बस्तर है। पहले जल-जंगल-जमीन और अब बस्तर को निशाना बनाया जा रहा है।
दरअसल, खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में कवर्धा के चारभांठा और बघर्रा केंद्रों में एमएसपी पर खरीदे गए करीब 26 हजार क्विंटल धान का शॉर्टेज सामने आया है। जांच में इसकी कीमत लगभग 7 करोड़ रुपए आंकी गई है। अधिकारियों का दावा है कि यह पूरा धान चूहों द्वारा खाया गया, जिस पर अब सियासी तूफान खड़ा हो गया है।
