CHATRA AIR AMBULANCE CRASH : Hopes pinned on debt… one flight and 7 deaths
रांची। झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया जंगल में एयर एंबुलेंस क्रैश ने सात परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। यह सिर्फ एक हादसा नहीं, कर्ज और उम्मीदों पर टिके सपनों का मलबा बन गया।
शाम करीब 7:11 बजे विमान ने रांची एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। खराब मौसम और कम विजिबिलिटी के बीच रूट डायवर्ट करने की कोशिश हुई, लेकिन 23 मिनट बाद ATC से संपर्क टूट गया। विमान सिमरिया के करम टॉड़ के पास घने जंगल में गिरा। हादसा इतना भीषण था कि पायलट, सह-पायलट, मेडिकल टीम, मरीज और परिजन सभी सातों की मौके पर मौत हो गई।
कर्ज लेकर डॉक्टर बनाया था बेटा
इस हादसे में रांची सदर अस्पताल में तैनात डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता की भी जान चली गई। उनके पिता बजरंगी प्रसाद, बिहार के औरंगाबाद के साधारण परिवार से हैं। जमीन बेचकर, कर्ज लेकर बेटे को डॉक्टर बनाया था। ओडिशा के कटक से एमबीबीएस कर चुके विकास के सिर पर परिवार की उम्मीदें थीं। सात साल का बेटा अब पिता के बिना है।
इलाज भी उधार से, उड़ान भी उधार
मरीज संजय कुमार, चंदवा के छोटे होटल संचालक थे। होटल में आग लगने से बुरी तरह झुलस गए। रांची में इलाज महंगा पड़ा तो दिल्ली रेफर किया गया। सड़क मार्ग जोखिम भरा था, इसलिए एयर एंबुलेंस बुक की गई। करीब 7.5 से 8 लाख रुपये उधार लेकर उड़ान भरी गई। परिवार को भरोसा था कि जान बच जाएगी, लेकिन टीवी पर क्रैश की खबर ने सब खत्म कर दिया।
17 साल का सपना भी टूटा
सिमडेगा का 17 वर्षीय ध्रुव कुमार, जो मोबाइल इंजीनियरिंग का सपना देख रहा था, अपने मामा की सेवा के लिए साथ गया था। वह भी इस हादसे में काल के गाल में समा गया। परिवार का इकलौता बेटा अब सिर्फ याद बनकर रह गया।
चार किलोमीटर पैदल रेस्क्यू
दुर्गम इलाके में राहत दल को मलबे तक पहुंचने के लिए चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। जवानों ने शवों को कंधों पर उठाकर बाहर निकाला। जंगल में बिखरे टुकड़े सिर्फ तकनीकी विफलता नहीं, टूटे सपनों और कर्ज की कहानी कह रहे थे।
जिला प्रशासन और जांच एजेंसियां हादसे के कारणों की जांच कर रही हैं। लेकिन जिन घरों में यह खबर पहुंची, वहां जिंदगी जैसे थम गई है।

