CG Vidhan Sabha : How did the drug banned in Gujarat reach Chhattisgarh?
CG VIDHANSABHA : गुजरात में बैन दवा छत्तीसगढ़ कैसे पहुंची?
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में सरकारी अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा।
गुजरात में गुणवत्ता मानकों पर विफल होने के बाद ब्लैकलिस्ट की गई दवा की छत्तीसगढ़ में सप्लाई को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा।
कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से दवा खरीद प्रक्रिया, गुणवत्ता परीक्षण और जिम्मेदारी तय करने को लेकर कई सवाल पूछे।
प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने पूछा कि जब गुजरात में संबंधित दवा को गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं पाए जाने के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया था, तो छत्तीसगढ़ में उसके संबंध में तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
विधायक अटल श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं की खरीद से पहले पर्याप्त गुणवत्ता परीक्षण नहीं हो रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या दवाओं की सप्लाई से पहले प्री-टेस्ट कराया जाता है और यदि नहीं, तो मरीजों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है।
विपक्ष ने सदन में सरकार से पूछा—
- क्या यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की एस्पिरिन टैबलेट गुजरात में गुणवत्ता जांच में फेल हुई थी?
- क्या इसकी जानकारी छत्तीसगढ़ शासन और सीजीएमएससी को मिली थी?
- क्या उसी कंपनी से छत्तीसगढ़ में भी दवा खरीद का आदेश जारी किया गया?
- दवा खरीद में सभी नियमों का पालन किया गया या नहीं?
- इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई?
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में स्पष्ट किया कि गुजरात मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड ने यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की कुछ एस्पिरिन दवाओं को गुणवत्ता मानकों पर विफल पाए जाने के कारण ब्लैकलिस्ट किया था। इस संबंध में कंपनी की ओर से 25 मार्च 2026 को सीजीएमएससी को सूचना भी दी गई थी।
हालांकि मंत्री ने कहा कि गुजरात में जिस दवा को ब्लैकलिस्ट किया गया था, वह छत्तीसगढ़ में खरीदी गई दवा से अलग थी।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि गुजरात मेंAspirin Gastro-Resistant Tablets IP 150 mg, Aspirin Gastro-Resistant Tablets IP 75 mg प्रतिबंधित दवाएं थीं।
जबकि छत्तीसगढ़ में सीजीएमएससी ने जिस दवा की खरीद का आदेश जारी किया था, वह Aspirin Tablets IP 75 mg (Uncoated Tablet) थी।
मंत्री के अनुसार इंडियन फार्माकोपिया-2022 के तहत दोनों दवाएं अलग-अलग श्रेणी की हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि दोनों दवाएं अलग होने के बावजूद मरीजों की सुरक्षा और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एहतियातन कार्रवाई की गई।
कंपनी से सूचना मिलने के बाद संबंधित एस्पिरिन टैबलेट की खरीद का आदेश रद्द कर दिया गया और कंपनी के साथ किया गया दर अनुबंध (रेट कॉन्ट्रैक्ट) भी समाप्त कर दिया गया।
