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भावेश भाई ज़ोरदार- इंसानियत की सराहनीय मिसाल, तपती धूप से बचने के लिए फुटपाथ पर बैठे दुकानदारों के लिए लगा दी छतरी तो कही लगा दिया प्याऊ…

गरियाबंद में तेज गर्मी की वजह से जहां घरों में बैठे लोग परेशान हैं. वहीं कुछ ऐसे लोग भी है जिनके पेट की आग के सामने तपती गर्मी भी बौनी है. गरियाबंद में जूते बेचने वाले मोची हो या सब्ज़ी विक्रेता धूप की मार एक साथ सभी झेल रहे हैं. गरियाबंद मेंन रोड हो या बाजार खुले आसमान के नीचे लगाया जा रहा है. 45 डिग्री की तपती गर्मी में भी मोचियों के पास एक छतरी के नीचे बैठने के अलावा और कोई दूसरा सहारा नहीं है.भावेश सिन्हा कहते है मुझे अच्छा लगता है की मै किसी के काम आ सकूँ मै जब भी मेंन रोड से गुजरता था उस जूते बेचने वाले मोची चाचा पर हमेस मेरी नज़र पड़ती थी और मै यही सोचता था जब हम ए॰सी॰ और कूलर में गर्मी का सामना नहि कर पा रहे है उस स्थिती में ये बिचारे कैसे अपना जीवन यापन कर रहे है और इसी लिए मुझसे जो हो सका वो मैंने किया मैंने मोची चाचा के लिए छतरी लगा दी और उनके चेहरे पर मुस्कान देख कर मुझे बहुत ख़ुशी हुई मै सभी व्यपारी भाइयों से निवेदन करता हूँ आप सभी जिससे जितना हो सके अपने से छोटे व्यापारियों का मदद करे उनका सहारा बने और साथ ही तेज गर्मी है इसे देखते हुए बाहर से आए ग्रामीणो के लिए पानी की व्यवस्था करे अगर हम पाँच पाँच दुकानदार एक साथ मिलकर प्याऊ लगा दे तो पूरे ज़िले मुख्यालय में आए बाहर से आए किसी भी व्यक्ति को पानी के लिए भटकना नहि पड़ेगा आख़िर शहर हमारा है मेन रोड पर मोची का काम कर रहे मोची चाचा बताते हैं कि सुबह 9 बजे से वो जूते चप्पल लेकर घर से निकलते है और रोड पर ही अपना दुकान लगाते है मेंन रोड में कही लार भी शेड या छाँव नहीं होने की वजह से सुबह से ही गर्मी पड़ने लगती है और धूप में ऐसे ही उन्हें जूते बेचने के साथ पोलिस करने के लिए बैठना पड़ता है. मोची चाचा का कहना ना तो उनके पास दुकान है और ना ही वे आर्थिक रूप से इतने मजबूत है कि वे किराए से दुकान ले कर अपना जीवन यापन करे रोड में बैठने के आलावा उनके पास और कोई रास्ता नहीं है. पेट की आग बुझानी है तो ये गर्मी झेलनी ही होगी. ऐसे में रोड में बैठना और गर्मी सहन करना बर्दासत से परे है और ऐसे वक्त में भावेस भाई ने रोड में ही हमें धूप से बचने के लिए  बड़ी छतरी लगा दी जो मेरे लिए बेहद कारगार साबित हो रहा है मै दिल से उनका धन्यवाद करता हूँ की वो हम जैसे छोटे दुकानदारो की पीड़ा समझ कर हमें धूप से बचाने के लिए छतरी लगा रहे है,भावेश सिन्हा कहते है मुझे अच्छा लगता है की मै किसी के काम आ सकूँ मै जब भी मेंन रोड से गुजरता था उस जूते बेचने वाले मोची चाचा पर हमेस मेरी नज़र पड़ती थी और मै यही सोचता था जब हम ए॰सी॰ और कूलर में गर्मी का सामना नहि कर पा रहे है उस स्थिती में ये बिचारे कैसे अपना जीवन यापन कर रहे है और इसी लिए मुझसे जो हो सका वो मैंने किया मैंने मोची चाचा के लिए छतरी लगा दी और उनके चेहरे पर मुस्कान देख कर मुझे बहुत ख़ुशी हुई मै सभी व्यपारी भाइयों से निवेदन करता हूँ आप सभी जिससे जितना हो सके अपने से छोटे व्यापारियों का मदद करे उनका सहारा बने और साथ ही तेज गर्मी है इसे देखते हुए बाहर से आए ग्रामीणो के लिए पानी की व्यवस्था करे अगर हम पाँच पाँच दुकानदार एक साथ मिलकर प्याऊ लगा दे तो पूरे ज़िले मुख्यालय में आए बाहर से आए किसी भी व्यक्ति को पानी के लिए भटकना नहि पड़ेगा आख़िर शहर हमारा है

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