Ankita Bhandari Case: ‘एक्सट्रा सर्विस’ देने को लेकर हुई थी अंकिता की हत्‍या, आरोपियों को हुई उम्र कैद

Date:

Ankita Bhandari Case: देहरादून। बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कोटद्वार जिला कोर्ट ने भले ही पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित उर्फ पुलकित गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा सुना दी है, लेकिन उस वीआइपी का राज अब तक नहीं खुल पाया, जोकि अब भी चर्चा में बना हुआ है। दोषी ठहराए गए अंकित गुप्ता ने रिसार्ट में रिशेप्सनिस्ट का काम करने वाली अंकिता भंडारी को 10 हजार रुपये देकर वीआइपी को एक्सट्रा सर्विस देने की बात कही थी, जिसके बाद दोनों के बीच झगड़ा हुआ।

वनंतरा रिसार्ट के मालिक पुलकित आर्य ने 19 सितंबर 2022 की सुबह राजस्व निरीक्षक तल्ला, गंगा भोगपुर को अंकिता भंडारी की गुमशुदगी की सूचना दी थी। 22 सितंबर 2022 को इस मामले की विवेचना राजस्व पुलिस से नियमित पुलिस को स्थानांतरित की गई, जिसकी विवेचना एसएसआइ मनोहर सिंह रावत ने की। विवेचना में हत्या, यौन शोषण, साक्ष्य मिटाने व आपराधिक षड़यंत्र का मुकदमा दर्ज किया गया। 24 सितंबर 2022 को शव बरामद होने के बाद शासन के आदेश पर एसआइटी टीम गठित की गई और अग्रिम विवेचना निरीक्षक राजेंद्र खोलिया को दी गई।

विवेचना में यह बात भी सामने आई कि 17 सितंबर 2022 को अंकिता भंडारी ने दोस्त पुष्पदीप को चैट में बताया कि रिसार्ट में कोई वीआइपी गेस्ट आने वाला है जिसको एक्सट्रा सर्विस देने का दबाव बनाया जा रहा है। इस बात पर अंकिता ने दोषी अंकित गुप्ता को डांट लगाई। इसका जिक्र कोर्ट के ट्रायल में भी किया गया है। पूर्व विधायक सुरेश राठौर व उर्मिला सनावर के बीच आडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद एक बार फिर वीआइपी का मामला गर्मा गया है। ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीबीआइ जांच की संस्तुति कर दी है।

जनभावनाओं के अनुरूप लिया निर्णय

वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनभावनाओं के अनुरूप यह निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने सभी प्रेशर को नकारते हुए आमजन की भावनाओं को ध्यान में रखा है। सीबीआइ जांच में यदि किसी वीआइपी का नाम सामने आता है तो उस दिशा में जांच होगी। शासकीय अधिवक्ता राजीव गुप्ता ने बताया कि सरकार का यह अच्छा कदम है। सरकार निष्पक्षता से इस मामले में जांच करवाना चाहती है। सीबीआइ जांच में दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। आमजन की यह मांग है कि वीआइपी का पता लगाया जाए तो सरकार ने सीबीआइ जांच करवाई।

सरकार को पहले ले लेना चाहिए था निर्णय

वरिष्ठ अधिवक्ता राघव ने बताया कि केस में यदि नए फैक्ट सामने आ रहे हैं, तो उसकी जांच करवाना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने सीबीआइ की संस्तुति कर दी है, यदि यह निर्णय कुछ समय पहले ले लिया होता तो लोगों को सड़कों पर नहीं उतरना पड़ता। संविधान की दृष्टि से आम नागरिक सर्वोत्तम है, ऐसे में उनके अधिकारों की रक्षा करना भी जरूरी है।

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img
spot_imgspot_img

#Crime Updates

More like this
Related