Alcohol Consumption Report: देश में सरकारों को पेट्रोलियम पदार्थों के बाद शराब से सबसे ज्यादा रेवेन्यू मिलता है, जिसकी वजह है कि हर साल हजारों करोड़ रुपये की शराब बिकती है. हालांकि इसके हानिकारक प्रभाव को देखते हुए बिहार, गुजरात जैसे कुछ राज्यों में तो शराबबंदी भी की गई है. इसके बावजूद इन राज्यों में लोग अवैध सप्लाई के जरिए पहुंची शराब का सेवन कर रहे हैं ऐसे में लोगों के मन में अक्सर ऐसे सवाल उठते है कि 140 करोड़ की आबादी वाले देश में किस राज्य के लोग शराब खरीदने पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं. आइए एक लिस्ट के जरिए जानते है कि शराब पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च किस राज्य में किया जा रहा है.
वित्त मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त रिसर्च इंस्टीट्यूट, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (एनआईपीएफपी) ने एक स्टडी की है. इसमें बताया गया है कि वर्तमान में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना वो दो राज्य हैं, जहां देश के किसी भी राज्य की तुलना में लोग शराब पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च करते हैं. NSSO के डाटा के मुताबिक, 2011-12 में भी आंध्र प्रदेश 620 रुपये के साथ शराब पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाले राज्यों में पहले स्थान पर था
‘सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी’ (CMIE) के उपभोक्ता पिरामिड घरेलू सर्वे (एचपीएचएस) के अनुसार, तेलंगाना में शराब पर सबसे ज्यादा खर्च किया जाता है, जहां एक परिवार औसतन 1623 रुपये प्रति वर्ष खर्च करता है. इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश में सबसे कम खर्च होता है, जहां क्रमशः 75 रुपये और 49 रुपये खर्च किए जाते हैं.
भारत के किन राज्यों में शराब पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च हो रहा?
CMIE के डाटा के आधार पर 2022-23 के लिए मौजूदा कीमतों पर सबसे ज्यादा शराब पर खर्च करने वाले राज्यों में पहले स्थान पर तेलंगाना है. इसके बाद आंध्र प्रदेश (1306 रुपये), छत्तीसगढ़ (1227 रुपये), पंजाब (1245 रुपये) और ओडिशा (1156 रुपये) का नंबर आता है. तमिलनाडु (841), हरियाणा (812 रुपये), झारखंड (624), गोवा (445) और केरल (379) भी शराब पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च करने वाले राज्यों में टॉप 10 में शामिल हैं.
भारत के किन राज्यों में सबसे कम शराब पर होता है पैसा खर्च?
CMIE के डाटा के मुताबिक, शराब पर सबसे कम पैसा खर्च करने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश (49 रुपये) पहले स्थान पर है. फिर राजस्थान (140 रुपये), त्रिपुरा (148 रुपये), मध्य प्रदेश (197 रुपये) और असम (198 रुपये) के साथ टॉप पांच राज्यों में शामिल हैं.

