छत्तीसगढ़ में खाद संकट गहराया, कृषि मंत्री चौबे बोले- केंद्र सरकार नहीं कर रही सहयोग

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रायपुर : छत्तीसगढ़ में खरीफ 2021 सीजन के लिए खाद का संकट गहरा गया है। किसान सड़क पर उतरने को मजबूर हो रहे हैं या फिर महंगे दामों में खाद खरीद रहे हैं। पिछले साल की तुलना में इस साल बुआई भी पिछड़ रही है। स्थिति यह है कि खाद के संकट को लेकर स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव अपनी ही सरकार के कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे को पत्र लिखना पड़ रहा है।वहीं मंत्री चौबे का कहना है, हमने सार्वजनिक रूप से कहा है कि केंद्र सरकार मांग के मुताबिक खाद की आपूर्ति नहीं कर रही है। उसका सहयोग नहीं मिल रहा है। बता दें छत्तीसगढ़ को 7 जुलाई की स्थिति में केवल 45 फीसदी ही खाद केंद्र से मिली है। मंत्री चौबे ने कहा, खाद के सकंट को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री के पत्र के बाद अंबिकापुर और कोरिया में रैक लग गई है। इससे वहां खाद की किल्लत लगभग दूर हो जाएगी। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में खाद की कमी है। इसके लिए मुख्यमंत्री लगातार केंद्र से लगातार आग्रह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, हमारी मांग के अनुरूप वो खाद दे पाएंगे या नहीं यह अलग बात है, लेकिन जो केंद्र ने जितनी सहमति दी है, उतना आवंटन तो दे दें।

5 लाख से हेक्टेयर की बुआई प्रभावित
खाद की कमी की वजह से लगभग 5 लाख हेक्टेयर की बुआई प्रभावित हुई है। राज्य में 7 जुलाई तक 17 लाख 49 हजार 770 हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई पूरी हो चुकी है, जो कि चालू खरीफ सीजन में बोनी के लिए निर्धारित 48 लाख 20 हजार हेक्टेयर रकबे का 36 प्रतिशत है। पिछले साल राज्य में इस समय तक 22 लाख 73 हजार 30 हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई पूरी हो चुकी थी।

दुर्ग : संभाग में 57 हजार मीट्रिक टन की दरकार
संभाग के पांच जिलों में लगभग ढाई लाख मीट्रिक टन रासायनिक खाद की जरूरत पड़ती है। इस खरीफ में सीजन में अब तक जरूरत का पचास फीसदी खाद ही सहकारी समितियों व कृषि केंद्रों के माध्यम से किसानों को मिली है। सहकारी समितियों के स्टॉक में अभी करीब 57 हजार मीट्रिक टन खाद है। लगभग इतनी ही खाद की डिमांड और भेजी गई है। अकेले दुर्ग जिले में ही 65 हजार मीट्रिक टन खाद चाहिए। अब तक किसानों को 30 हजार मीट्रिक टन खाद मिली है। स्टाक में करीब 10 हजार मीट्रिक टन खाद ही उपलब्ध है। संभाग के पांचों जिलों में सोसाइटी में आते ही खाद का उठाव हो जाता है। बाद में पहुंचने वाले किसानों को बैरंग लौटना पड़ता है।

बिलासपुर : सभी जिलों निर्धारित मात्रा से कम खाद मिली
सभी जिलों में निर्धारित से कम मात्रा में खाद मिली है। इससे किसानों को समितियों के बजाय बाहर से महंगी खाद लेनी पड़ रही है। कोरबा जिले में प्राथमिक सहकारी समितियों में पांच हजार 768 टन और निजी दुकानों में 3 हजार 019 टन रासायनिक खाद खरीफ की खेती के लिए उपलब्ध है। किसानों द्वारा अभी तक इसमें से 5 हजार 027 टन खाद का उठाव किया जा चुका हैं तथा 3 हजार 760 टन उर्वरक भंडारण केन्द्रों में शेष हैं। ज्यादातर जिलों मांग के अनुपात में कम आपूर्ति हु़ई है, जिससे किसानों की दिक्कतें बढ़ गई है। वहीं मार्कफेड अफसर सुनील सिंह राजपूत का कहना है कि बहुत जल्द डीएपी की रैक लगने वाली है।

जगदलपुर : किसान ऊंची दरों पर यूरिया और डीएपी खरीदने पर विवश
बस्तर में खाद की कमी से किसान हलाकान हैं। लेम्प्स में खाद न मिल पाने की वजह से किसान मार्केट से महंगे दामों से खाद खरीदने विवश हैं। बस्तर में यूरिया और पोटाश की सर्वाधिक कमी बनी हुई है। बकावंड के किसान श्रीनिवास मिश्रा का कहना है कि अफसरों की लापरवाही के कारण जिले में समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। कृषि व लेम्प्स के अफसरों से बात करने पर बार बार एक ही बात का हवाला दिया जाता है कि दो माह पहले ही ऑर्डर दिया जा चुका है। एक सप्ताह में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध हो जाएगी। वहीं कृषि विभाग के उपसंचालक विकास साहू ने बताया कि खाद की रेक रवाना हो गई है। दो-तीन दिनों में स्टॉक पहुंच जाएगा।

फैक्ट फाइल
खाद की मांग और आपूर्ति पर एक नजर
खाद- मांग- आपूर्ति
यूरिया- 5.50 लाख टन- 2.32 लाख टन
डीएपी-3.20 लाख मीट्रिक टन-1.21 लाख मीट्रिक टन
एनपीके उर्वरक- 80 हजार मीट्रिक टन- 48 हजार मीट्रिक टन
एमओपी उर्वरक- 75 हजार मीट्रिक टन- 45 हजार मीट्रिक टन
सिंगल सुपरफॉस्फेट-1.50 लाख मीट्रिक टन- 80 हजार मीट्रिक टन
(नोट- आंकड़े 7 जुलाई की स्थिति में)

पिछले छह साल में सबसे कम मिली खाद
वर्ष- मिलने वाली खाद की मात्रा प्रतिशत में
2015- 89
2016- 79
2017- 73
2019- 80
2020- 89
2021- 45

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