BILASPUR HIGH COURT : Priest is not the owner, big decision of High Court
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धार्मिक संपत्ति को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि भगवान की संपत्ति का प्रबंधन करने वाला पुजारी या सर्वराकार उसका स्वतंत्र मालिक नहीं बन सकता।
मामला रायपुर के ठाकुर रामचंद्र जी स्वामी जैतूसाव मठ पब्लिक ट्रस्ट की संपत्तियों से जुड़ा था। राजस्व रिकॉर्ड में कलेक्टर का नाम मैनेजर/सर्वराकार दर्ज किए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी।
DELHI: SIR में आडवाणी-जयशंकर समेत कई दिग्गजों को नोटिस!
जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में किसी का नाम दर्ज होना उसके सर्वराकार पद या ट्रस्ट की संपत्ति पर अंतिम अधिकार तय नहीं करता।
याचिकाकर्ता महंत राम आशीष दास ने वसीयत, गोद लेने के दस्तावेज और सर्वराकार के रूप में नियुक्ति के आधार पर संपत्तियों पर अपना दावा किया था। मामले में राजस्व अधिकारियों के अलग-अलग आदेशों के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुजारी उत्थान एवं कल्याण समिति मामले में तय सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार मालिकाना हक नहीं देता। कोर्ट ने अनुच्छेद 227 के तहत हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
