Bastar Tiranga Yatra: After Red Terror, the challenge of development and trust!
BASTAR TIRANGA YATRA: बस्तर में तिरंगा यात्राओं ने बदलते माहौल की तस्वीर पेश की है। कभी माओवादी प्रभाव वाले इलाकों में अब युवा हाथों में तिरंगा लेकर सड़कों पर निकल रहे हैं। सरकार इसे शांति, सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था की वापसी का प्रतीक बता रही है।
हालांकि, सशस्त्र नक्सलवाद के कमजोर होने के बावजूद चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। बारूदी सुरंगों और विस्फोटक अवशेषों का खतरा, माओवादी नेटवर्क के संभावित नए रूप और दूरदराज इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था अभी भी चिंता का विषय हैं।
अब बस्तर की अगली बड़ी चुनौती सुरक्षा के साथ विकास और भरोसा कायम करना है। स्कूल, अस्पताल, सड़क, इंटरनेट, बैंकिंग, रोजगार और वन उपज का उचित मूल्य जैसी सुविधाएं गांवों तक पहुंचाना जरूरी होगा। साथ ही आदिवासी समाज की संस्कृति, भाषा और अधिकारों को विकास की प्रक्रिया का केंद्र बनाना होगा।
तिरंगा यात्रा निश्चित रूप से बदलाव की सकारात्मक तस्वीर है, लेकिन इसकी असली सफलता तब मानी जाएगी जब बस्तर का हर नागरिक बिना भय के तिरंगा फहरा सके और अपने भविष्य का फैसला बंदूक नहीं, लोकतंत्र के माध्यम से कर सके।
