KHAMENEI FUNERAL : Khamenei’s farewell after 4 months
रायपुर डेस्क। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आखिरकार शुरू हो गई है। करीब चार महीने बाद अब उन्हें उनके जन्मस्थान मशहद में दफनाया जाएगा। 4 जुलाई से 9 जुलाई तक पूरे ईरान में राजकीय और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि फरवरी में अमेरिका और इजरायल के हमले में उनकी मौत के बाद क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए थे। सुरक्षा कारणों से अंतिम संस्कार को टाल दिया गया था। अब युद्धविराम के बाद अंतिम विदाई का कार्यक्रम तय किया गया है।
4 जुलाई को तेहरान में श्रद्धांजलि सभा और अंतिम दर्शन की व्यवस्था की गई है। इसके बाद शव को क़ोम और अन्य धार्मिक स्थलों पर ले जाया जाएगा। लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए पूरे देश में हाई अलर्ट और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
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अंतिम रूप से 9 जुलाई को मशहद में धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। खास बात यह है कि उन्हें उसी शहर में दफनाया जाएगा, जहां उनका जन्म हुआ था।
भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी उनके साथ मौजूद हैं।
कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद भी तेहरान पहुंचे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, भारत सरकार का नहीं।
रूस, चीन, पाकिस्तान, तुर्किए, इराक, सीरिया, लेबनान, क्यूबा और कई अन्य देशों के प्रतिनिधि भी इस अंतिम विदाई समारोह में शामिल हो रहे हैं, जिससे यह एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन बन गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निमंत्रण मिला था, लेकिन पूर्व निर्धारित विदेश कार्यक्रमों के कारण वे शामिल नहीं हो सके। हालांकि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से बातचीत कर संवेदना व्यक्त की और भारत-ईरान के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया।
