CJI Suryakant: No More Long Waits for Bail!
CJI SURYAKANT : सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने देशभर के हाई कोर्ट्स में जमानत याचिकाओं के तेजी से निपटारे के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश में कहा है कि जमानत मामलों की सुनवाई हर हफ्ते या अधिकतम 15 दिन में होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के ये निर्देश ऐसे समय आए हैं जब देशभर की अदालतों में बड़ी संख्या में जमानत याचिकाएं लंबित हैं और सुनवाई में देरी को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है।
क्या हैं सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश?
1. कोर्ट ने कहा कि जमानत याचिकाओं को साप्ताहिक या पखवाड़े (हर 14 दिन) के आधार पर नियमित रूप से सूचीबद्ध किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों की ऑटोमैटिक लिस्टिंग की व्यवस्था विकसित की जा सकती है, ताकि हर दो सप्ताह में मामला स्वतः सूचीबद्ध हो जाए।
2. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जमानत याचिका की पहली सुनवाई से पहले जांच एजेंसी या राज्य की ओर से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करना अनिवार्य होगा।
3. अदालत ने कहा कि जमानत याचिका दायर करने वाले वकील के लिए यह अनिवार्य होगा कि याचिका की प्रति राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) कार्यालय या नामित एजेंसी को पहले से उपलब्ध कराई जाए।
4. कोर्ट ने निर्देश दिया कि नई जमानत याचिकाओं को वैकल्पिक दिनों पर या अधिकतम एक सप्ताह के भीतर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
5. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एडमिशन स्टेज पर नोटिस जारी करने की पारंपरिक प्रक्रिया जमानत मामलों में खत्म की जानी चाहिए। इससे सुनवाई में होने वाली देरी कम होगी। अगर किसी कारण से जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं हो पाती है, तो उसे अपने आप दोबारा लिस्ट किया जाए।
6. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट्स से कहा कि जमानत मामलों के जल्द निबटारे के लिए समय-सीमा तय करें। अदालत ने कहा कि ऐसी न्यायिक संस्कृति विकसित की जानी चाहिए, जिसमें केंद्र या राज्य सरकारों का सामान्य या गैरजरूरी स्थगन न दिए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि न्यायालयों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।
यह आदेश जमानत मामलों में प्रक्रिया को तेज, व्यवस्थित और अधिकार-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

