Impact of Iran-US-Israel Conflict: Major Surge in India’s Wholesale Inflation; Commodity Prices Rise
Iran-America-Israel War Impact: Iran-America-Israel में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर अब भारतीय इकोनॉमी पर दिखने लगा है। फरवरी में भारत की थोक महंगाई दर 11 महीने के उच्च स्तर 2.13 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह जानकारी 16 मार्च को जारी आंकड़ों में सामने आई।थोक महंगाई में यह बढ़ोतरी हाल के महीनों में खुदरा महंगाई के रुझान के अनुरूप है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर खुदरा महंगाई फरवरी में 2.7 प्रतिशत से बढ़कर 3.2 प्रतिशत हो गई, जिसका मुख्य कारण खाद्य कीमतों में तेज बढ़ोतरी रहा।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग लंबी चली तो कच्चे तेल के दाम 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं। इससे पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, जिससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा और फल-सब्जी समेत हर जरूरी सामान की कीमतें बढ़ जाएंगी।
जानिए क्या कहते हैं महंगाई के आंकड़े
- फरवरी में खाद्य WPI 1.41% से बढ़कर 1.85% हो गई.
- फ्यूल और पावर WPI -4.01% से बढ़कर -3.78% पर पहुंच गई.
- मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट WPI 2.86% से बढ़कर 2.92% हो गई.
- प्राइमरी आर्टिकल्स WPI बढ़कर 3.27% हो गई.
- आलू की होलसेल महंगाई बढ़कर -27.42% हो गई, जबकि प्याज की होलसेल महंगाई घटकर -40.95% हो गई.
- अंडे, मांस और मछली की WPI 3.66% से बढ़कर 5.36% हो गई.
- सब्जियों की WPI 6.78% से घटकर 4.73% हो गई.
- अनाज की WPI -1.41% से घटकर -2.44% हो गई
थोक महंगाई ऐसे वैश्विक कमोडिटी झटकों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती है, क्योंकि थोक मूल्य सूचकांक में ईंधन, धातु, रसायन और अन्य औद्योगिक इनपुट का बड़ा हिस्सा शामिल होता है। कच्चे तेल या ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी WPI को उपभोक्ता महंगाई की तुलना में ज्यादा तेजी से ऊपर ले जा सकती है।

